ALL Image PP-News BADA Herbal Company EPI PARTY IBBS MORCHA LIC & Job's SYSTEM
2019 चुनाव, मूलनिवासी भूमिका
November 30, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

*🔥2019 चुनाव, मूलनिवासी भूमिका🔥* 
                   दिनांक-  20-03-2019
    *भाई साहब आप का सुझाव बहुत सही है कि देश की सभी जातीय व क्षेत्रीय संगठन बामसेफ और उसके  58 संगठनो मे विलीन हो जाए। पहले आप बताइए कि आप लोग खुद ही  58 संगठन क्यो बना कर रखे हुए है। सबको मिलाकर सिर्फ बामसेफ रखिए और यदि सही मे दिलो-दिमाग से आप मान्यवर कांशीराम जी को बामसेफ का संस्थापक, मसीहा, या गुरू मानते है  और देश को ब्राह्मण मुक्त देखना चाहते है  तो , इस ताकत को आर एस एस  की तरह , बसपा पर निःस्वार्थ, बिना किसी औपचारिकता के लगा दीजिए। उसी दिन आप महान पुरुष और आप का असली दुख,  सतीश मिश्रा या तो  पार्टी छोड़कर भाग जाएगा, या आफिस मे झाडू लगाएगा।* 
    लेकिन अफसोस आप लोगो से ऐसा नही होगा क्योंकि आप का मूलनिवासी मिशन की  विचारधारा, नकारात्मक सोच और नकारात्मक उद्देश्य की नींव पर ही खड़ी है। 
    *1978 तक बामसेफ के जो मुख्य 4-5 लीडर हुआ करते थे , वे सभी महाराष्ट्र के ज्यादातर बुद्धिष्ट थे, जिनको कांशीराम की अधीनता स्वीकार नही थी। मजबूरी मे निकाला या निकला कहिए, बामसेफ के दो भाग हो गये, कांशीराम की अनरजिष्टर्ड बामसेफ कही जाती थी। खापर्डे जी की रजिस्टर्ड बामसेफ। यह कहना सरासर झूठ है कि नियमानुसार कांशीराम साहब  DS-4 या BSP के अध्यक्ष बनने के बाद BAMCEF से रिजाइन कर दिया। क्या कोई अपना खुद का बनाया हुआ घर छोडता है ? काश ! इस दर्द को कोई महसूस करने की कोशिश करता ? उन्होंने खुलकर किसी का नाम लिए बगैर यह हर मीटिंग मे कह देते थे कि यहां के लोग ,अपने सामने दूसरो को कुछ समझते नही और सभी केकड़ा प्रवृत्ति यानि एक दूसरे की टांग खीचने वाले नालायक लोग है। इसीलिए आगे नही बढ़ते है। शुरू मे मुझे बड़ा विचित्र व बुरा लग रहा था । बाद मे पता चला कि उनके साथ किया हुआ विश्वासघाती दर्द कभी-कभी जबान से छलक जाता है।* 
    कांशीराम साहब ने अपने मिशन को उत्तर भारत की ओर मोड़ा। मै  1982 अक्टूबर मे नैनी जेल की दीवार पर यह स्लोगन - 
 *ब्राह्मण क्षत्रिय, बनिया छोर।* 
 *और बाकी सब डी यस फोर।।* 
 पढ़ने के बाद DS-4 की तलाश करते हुए मुम्बई मे बड़े नाटकीय ढंग से BAMCEF तक पहुचा।  
   *कांशीराम साहब उत्तर भारत मे सफल हो गये और आप लोग अपने मे ही कई टुकड़े करके साल मे एक अधिवेशन मनाने लगे। मैने कई अधिवेशन आप के अटेंड किए है। नाश्ते और दोपहर के खाने के साथ दो शेसन चलते थे। वक्ता पहले से ही फिक्स हो जाते थे। तीन दिन का पूरी फेमिली के साथ पिकनिक जैसा आनंद लोग लेते थे। रोज ही प्रेस किए हुए कपडे बदले जाते थे। 
   *वही कांशीराम के समर्पित कार्यकर्ता हर शनिवार या रविवार को पूरे देश मे हजारो गुप्त  प्रशिक्षण शिविर चलाते थे और कांशीराम साहब रोज ही पूरे देश मे भ्रमण करते हुए मिटिंग किया करते थे। इस मिशन को सफल बनाने मे उत्तर भारत मे सैकड़ो कार्यकर्ता शहीद हुए है, आज उनकी कोई अहमियत नही है और उनके परिवार को कोई पूछने वाला भी नही है।** 
   मै मानता हूं कि कांशीराम साहब के अस्वस्थ होने के बाद इस मिशन पर पूजीपतियो का कब्जा हो गया, इसके कारण बामसेफ की धीरे-धीरे अहमियत खत्म होने लगी और आपलोगो का अकेला राज हो गया जो आजतक चल रहा है। साहब ने जो दस साल मे कर दिखाया ,वही आप सभी मिलकर  40 सालो मे भी नही कर पाए और यदि ऐसा ही चलता रहा तो आगे भी नही कर पाएगे। मै अनुभव से कह रहा हू, क्योंकि आप के पास बामसेफ के माध्यम से पैसा है, इसलिए कार्यकर्ता है लेकिन वोटर नही है,  वही बसपा के पास कार्यकर्ता के साथ समर्पित भोटर भी है । आप दोनो एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बनकर, शूद्रो के भोट मे सेध लगाकर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भाजपा का ही साथ दे रहे है ।
 *🔥परिस्थितिया और मजबूरिया🔥* 
  शुरुआती दौर मे जब चमार और  जाटव पूरी ताकत के साथ जुड़ा, थोड़े बहुत मा0- साहब से प्रभावित होकर ओ बी सी का बुध्दिजीवी वर्ग भी जुड रहा था लेकिन दबंगई के कारण बसपा के लोग भोट नही डाल पाते थे।
 पहली बार जब स्लोगन-
    *मिले मुलायम कांशीराम।* 
     *हवा मे उड़ गये जयश्री राम।।* 
  *तब पूरा भोट मिला। गरीब लोग भी बिधायक बन गए  और सरकार भी बन गयी।* 
   दुर्भाग्य रहा, गठबंधन टूट गया।
 करीब करीब पिछडो ने साथ छोड दिया। साहब को फिर दबंगई रूपी बैसाखी की जरूरत थी। इसीलिए मजबूरी मे भाजपा के साथ गठबंधन, फिर नजदीकिया होने के कारण इस मजबूरी का  ब्राह्मणो ने भरपूर फैदा उठाया। परिणाम यह हुआ कि,  बुरे दिन राजनीति के साथ साथ अम्बेडकर मिशन के लिए भी आने लगा। जय भीम की जगह प्रणाम व नमस्कार शुरू हो गया और हम जैसे लोग, असहाय और मजबूर होकर तमाशबीन बनकर रह गये ।
   *कांशीराम साहब का कहना था, जितना जल्दी जल्दी चुनाव होगा,  उतना ही हमारा फायदा होगा । भाजपा के आने का मुझे डर नही है। क्योंकि मेरे लिए भाजपा को हराना बहुत आसान है। हम काग्रेस को जितना  कमजोर व मजबूर बनाएंगे, हम उतना ही मजबूत होगे। इस मिशन मे साहेब  को सफलता भी मिली। लेकिन बसपा के प्रति  पिछड़ी जातियो का मोहभंग, ब्लैकमेलिंग और  शूद्रो की गद्दारी के कारण भाजपा सफल हो गई।* 
  *🔥थपेड़े लगे तो होश ठिकाने आए।*🔥
   *आज खुशी है कि सपा, बसपा, राजद और समान विचारधारा के लोग एक मंच पर आ गये है। यदि सही मे दिल से मजबूत गठबंधन हुआ तो, सवर्ण या ब्राह्मण फैक्टर का कोई बजूद नही रह पाएगा।* 
   मूलनिवासी भाइयो आप लोगो का एक ही विरोध, बहन जी ब्राह्मण को निकाले तब हम लोग समर्थन देगे। मिश्रा तो आज आया है, आप लोगो का विरोध तो कांशीराम साहब के लिए शुरुआत से ही है और उनके अच्छे दिनो मे भी आप लोगो का सहयोग कभी भी नही रहा है। मेरा अनुरोध व सुझाव भी है कि अब बहाने मत बनाइए और देश की विकट स्थिति को देखते हुए अपने लोगो के साथ हो जाइए। रही बात कि ब्राह्मण बसपा मे जीतकर आ जाएगे तो उन्हे जय भीम के सम्बोधन के साथ अम्बेडकरवादी व उनमे शुद्रत्व की भावना पैदा करना, हम सभी शूद्रो की जिम्मेदारी बनती है।
    *यदि गठबंधन का सहयोग अहंकार बस नही कर सकते है  तो आप सभी पुराने मूलनिवासी और बामसेफ भाई मिलकर अपने जन्म व कर्म भूमि पर आकर पूरी ताकत के साथ पहले महाराष्ट्र पर कब्जा कर लीजिए क्योकि यहा आजतक सिर्फ कांग्रेस या भाजपा का ही शासन चलता चला आ रहा है। पूरी जमीन मूलनिवासी के लिए खाली है आप का यहा शूद्रो मे कोई प्रतिद्वंद्वी नही है ।* 

 आप के लेख की प्रतिक्रिया मे  चित्रण  स्वस्थ भावना से, यदि मतभेद हो तो माफी चाहता हूं।धन्यवाद!
  आप का समान दर्द का हमदर्द साथी! 
 *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
 मो0- W- 9869075576
               7756816035