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आरक्षण के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अफ़सोसजनक
February 12, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

आरक्षण के सन्दर्भ में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद अफ़सोसजनक है। सुप्रीम कोर्ट एवं तमाम हाइकोर्ट के माध्यम से लगातार आ रहे आरक्षण विरोधी फैसले इस बात का सबूत है कि न्यायपालिका पर पूरी तरह से ब्रहमणवादीयों का नियंत्रण स्थापित हो गया है।कांग्रेस इस फैसले को लेकर भाजपा का विरोध कर रही है लेकिन यदि कांग्रेस ने न्यापालिका में आरक्षण लागू किया होता और रिजर्वेशन इम्पलीमेन्टेशन ऐक्ट बनाया होता तो आज ऐसे फैसले नहीं आते । वास्तविकता यह है कि कांग्रेसकांग्रेसऔर भाजपा दोनो का चरित्र हमेशा से आरक्षण विरोधी रहा है।1918 में जब बाबासाहेब डा अंबेडकर और भास्कर राव जाधव ने रिजर्वेशन की मांग की थी तब कांग्रेस बड़े नेता बाल गंगाधर तिलक ने इसका विरोध किया था और कहा था कि "तेली तमोली और कुनभटो को संसद में जाकर क्या हल चलाना है" गांधी जी ने अमरण अनशन करके श्डूल कास्ट को मिले अधिकारो को छीन लिया।बाबा साहेब अम्बेडकर ने संविधान में आरक्षण लागू किया तो नेहरू ने आरक्षण पर अमल करने के बजाय मुख्यमंत्रीयो को आरक्षण पर अमल न करने के लिए चिठ्ठी लिखा।नेहरू ने ओबीसी की गिनती रोक दिया, ओबीसी के कालेलकर कमीशन को नेहरू ने कचरे के डिब्बे में डाल दिया। आरक्षण को प्रभावहीन करने के लिए  निजीकरण की शुरूवात कांग्रेस ने किया और निजीकरण में आरक्षण लागू नहीं किया । मण्डल कमीशन में धोखेबाजी करने के लिए और धोखेबाजी पर पर्दा डालने के लिए बाबरी- मस्जिद और राम जन्मभूमि का मुद्दा शुरू किया। 2011 मे जब ओबीसी की जाति आधारित गिनती का मुद्दा खड़ा हुआ तो तो कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन शुरू किया। असल बात यह है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनो शाजिस करके देश के विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और मीडिया सहित देश के सभी संस्थानों पर ब्रहमणो का कब्जा करवा दिया है और देश में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों को अधिकार वंचित करके रखा है। इसलिए हमें कांग्रेस और भाजपा दोनों के झांसे से निकलकर हमें अपना स्वतंत्र आत्मनिर्भर आन्दोलन निर्माण करना होगा।तमाम समवैचारिक संगठनों के साथ मिलकर जल्द ही इस फैसले के विरोध में बड़ा आन्दोलन घोषित किया जायेगा। 
            चौधरी विकास पटेल
राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा