ALL Image PP-News BADA Herbal Company EPI PARTY IBBS MORCHA LIC & Job's SYSTEM
आस्था भी एक मानसिक विमारी है
April 21, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

*🔥आस्था भी एक मानसिक विमारी है🔥* 
      कुछ दिन पहले, मैं अपने एक पुराने मित्र,  सेवानिवृत सीनियर क्लास वन अधिकारी से उनके घर पर दुखी हालत मे मिलने गया। बहुत सारे भगवानो का सजा हुआ  जमावड़ा देखकर तथा उनकी दुखभरी जिन्दगी महसूस कर, बातचीत के दौरान, अनायास ही मेरे मुह से निकल गया की, 
  *आप जिन्दगी भर नास्तिक रह गए, कभी कभार भगवान् को भी एक आध छण  के लिए याद कर लिया करो, हो सकता है कुछ अच्छे दिन लौट आए।* 
  मेरा दोस्त मुझे जानता था कि मै  तथाकथित हिन्दू भगवानो मे आस्था नही रखता हू। आश्चर्य से यह तुम कह रहे हो! अरे मै तो बचपन से आजतक, हनुमान जी का भक्त रहा हूं।, पूरी लगन से पूजा -पाठ करते आ रहा हूं और मुझे, तुम नास्तिक कह रहे हो! 
  *हां, मै सही कह रहा हूं।* 
  *आप को किसने कहा कि हनुमान भगवान् है? अभी तक तो उनके जाति का, धर्म का, यहां तक कि पैदाइशी का ही पता नही चला है? क्या आप ने विश्व के किसी महान दार्शनिक, वैज्ञानिक,  धार्मिक या भारत के महान विचारक, विद्वान बाबा साहब के मुख से कभी सुना है कि हनुमान जी भगवान् है?* 
    नही , कभी नही सुना। फिर किससे सुना? उत्तर था, बचपन मे गांव के पंडित जी से।
    *मान लीजिए आप को भूख लगी है और किसी ने कह दिया कि,  जाओ उस मकान के बाथरूम मे खाना रखा हुआ है लेकर खा लेना। क्या आप को वहां खाना मिलेगा? किसी ने कह दिया और अन्धभक्ति मे आप ने मान लिया? तर्क तो करना पडे़गा, बुद्धि तो लगानी पड़ेगी, कि खाना बाथरूम मे कैसे मिलेगा? कहने वाले के विश्वास को आप को तोड़ना पड़ेगा और फिर किचेन मे अपनी बुद्धि से खाना ढूंढना पड़ेगा, तभी आप की भूख मिटेगी। अन्यथा भूखे पेट रह जाओगे ।* 
    ऐसे ही पहले भगवान् को पूरे विश्व के परिप्रेक्ष्य मे  जानिए  समझिए, परखिए, महसूस कीजिए, तभी मानिए । अन्यथा आप किसी की भी अनजाने मे पूजा -पाठ कर रहे है , तो आप सही मायने मे नास्तिक ही हुए।
    *माफी चाहता हू सिर्फ आप ही नही, 98% हिन्दू अनजाने मे नास्तिक ही होता है। किसी की भी, जैसे गोबर के गौरी -गणेश, पेड पौधे, नदी-नाले, पशु-पक्षी और इनकी फोटो मूर्ति आदि तैंतीस करोड़ देवी -देवताओ की पूजा करता रहता, सन्तुष्ट न होने पर एक दूसरे को जिन्दगी भर  बदलता, भटकता और ढूंढता  रहता है और मरते समय तक मिलता भी नही है।* 
  उनका प्रश्न था फिर भगवान् कौन है और कहा है? 
  *देखिए पूरै विश्व के महान विचारक, विद्वान, वैज्ञानिक और दार्शनिक लोगो ने किसी बस्तु ,पदार्थ या इन्सान के रूप मे भगवान् के अस्तित्व को नकारा है।* 
 एक शक्ति, या ताकत जो प्रकृति या नेचर के रूप मे है जिससे पूरा ब्रह्मांड संचालित होता है। पृथ्वी और चंद्रमा द्वारा सूर्य की परिक्रमा मे यदि  एक माइक्रो सेकंड का भी संतुलन बिगड जाए तो पृथ्वी पर कोई जीव जन्तु या बनस्पति,  यहा तक की तथाकथित भगवान् भी नही बचेगा। इसी शक्ति को गाड, भगवान् के रूप मे माना गया है।
  *और यह भी ध्यान रखिए कि आजकल के CVCAMRA की तरह , वह शक्ति आप के हर अच्छे -बुरे, कर्मो  की हर समय निगरानी रखती है और आप के अच्छे -बुरे कर्मो का परिणाम भी आप को मिलता है।* 
   अब भाई साहब कुछ असमंजस मे पड गए, मैने उन्हे हिदायत देते हुए कहा कि, भगवान् के बारे मे कुछ और जानकारी लेना है तो यह हमारी लिखी पुस्तक मानवीय चेतना के  "गाड, भगवान् और ईश्वर "पाठ का अध्ययन कर लीजिएगा।
  *खुशी की बात यह है कि दो दिन बाद पता चला कि, उन्होंने हनुमान जी को मन्दिर के साथ परवाह कर  दिया और भगवान् नाम के भूत से मुक्त हो गए।* 
  उन्होंने शुक्रिया व आभार ब्यक्त किया।
  *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
   मो0-W -7756816035
               9869075576