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असल मे वह मायावती से नही, बल्कि पुरूष वर्चस्ववाली व्यवस्था ढह जाने से डरते है। मायावती केवल एक व्यक्ति नही, वह जातिव्यवस्था में नीचा समझे गए घटकों से उभरा हुआ एक ऐसा चैलेंज है, जिसे स्त्री को भोगवस्तु समझने वाले पचा नही पा रहे है। इसलिए वह मायावती की सुंदरता से लेकर भैस की उपमा देनेतक सबकुछ कर सकते है। इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी थी, लेकिन उन्हें भी भरपूर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जन्म से ब्राह्मण स्त्री भी वर्णव्यवस्था में शुद्र ही समझी जाती है, मायावती तो अछूत चमार जाती से है। जाती+लिंग का गणित जोड़ा जाए, तो मायावती अनेको के लिए नफरत का सबब है। जो जाती से स्वयंको ऊंचा समझते है, उनकी हजारो साल की मानसिक गुलामी की वजह से उनका विरोध समझा जा सकता है, लेकिन जो खुद अछूत या निम्न जातियों से आए है, ऐसे पुरुषों का विरोध केवल पुरषी अहंकार का प्रतीक भर है। मान्यवर कांशीराम जी ने क्यों बहनजी को अपना उत्तराधिकारी चुना, इस वजह से बसपा छोड़नेवालों से लेकर मूलनिवासी कहलानेवाले तक इस रोग से पीड़ित है। इन लोगो के संगठनों में काम करनेवाली महिलाए भी इनके नेतृत्व के चारित्र्य को जानकर भी अनजान बनी रहती है। अपने ही समाज के एक महिला नेतृत्व का जी जान से विरोध करनेवाले समाज को शासनकर्ता बनाना यकीनन आसान नही है। लेकिन चूंकि वह मायावती है, उन्होंने इस नकारात्मक परिस्थितियों से जूझते हुए ही यह मुकाम हासिल किया है। मायावती नाम की एक महिला को बहनजी की गरिमामयी उपाधि हासिल करने में कड़ा संघर्ष करना पड़ा है। अगर संघर्ष नही होगा तो बहनजी बहनजी नही रह जाएगी। संघर्ष उनकी सांस है। विरोधियो को इस मायावती का पूरा अभ्यास है। विरोधी यह भी जानते है कि अपनो द्वारा दिया गया दर्द सबसे ज्यादा चुभता है। इसलिए वह कभी जन्मदिन के केक को लेकर तो कभी आनंद तो कभी आकाश को लेकर समर्थकों में भ्रम की स्थिति पैदा करने की हमेशा कोशिश करते है। शासनकर्ता केवल बहनजी को नही बनना है, आपके समाज को भी शासनकर्ता बनना है। शासनकर्ता बनने की योग्यता हमे अपने समाज मे पैदा करनी है, और शासनकर्ता बनने योग्य समाज विरोधियो के ओछे हथकंडों में इतनी आसानी से नही फसाया जा सकता। ऐसे कई हथकंडे अपनाए जाएंगे, भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की जाएगी, आपको संगठन से जुड़े रहना है। चाहे कितने भी आंधी तूफान आए, बहनजी के नेतृत्व में यकीन रखना है। वोट हाथी पर देना है और हाथी के लिए कई कई वोट लाने भी है, चाहे उम्मीदवार किसी भी जाति धर्म पंथ का हो। शासनकर्ता बनने के लिए इतना तो करना ही होगा। जय भीम - जय भारत!
November 20, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)