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ब्राह्मण उच्च और शूद्र नींच कैसे
May 4, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥19वां एपिसोड,सुबह, दिनांक26-04-2020🔥
🔥ब्राह्मण उच्च और शूद्र नींच कैसे?🔥
   सच तो यह है कि ब्राह्मणों द्वारा लिखित पौराणिक कथाएं कपोल कल्पित है, फिर भी उन्हीं की प्राचीन कथाओं से, शंकर भगवान डोम आदिवासी शूद्र जाति के थे, जिनकी ब्राह्मण भी पूजा अर्चना करता है। श्रीकृष्ण भगवान नहीं, एक नायक महापुरुष यादव कुल में पैदा हुए। महाकवि बाल्मीकि जिन्होंने बाल्मीकि रामायण की रचना की, आप ही के कथनानुसार शूद्र जाति में पैदा हुए थे।
   तुलसी के अनुसार,राम भगवान नहीं, पुरुषों में उत्तम, पुरुषोत्तम थे। जीवनी, चरित्र और आचरण की समीक्षा करने पर तो आज के साधारण इंसान की भी झलक उनमें दिखाई नहीं देती है, कहावत है, अंधों में काना राजा, इसलिए ईगो के कारण किसी भगवान का नहीं, एक नकली भगवान पैदा कर उसकी पूजा-पाठ और राम मंदिर निर्माण के लिए सत्याग्रह किए जा रहे हैं।
  ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आंकलन करेंगे तो, सैकड़ों सालों तक मुगलों मुसलमानो का शासन -प्रशासन रहा। उनके अच्छे कामों को देखते हुए, क्षत्रियों ने अपनी बहन-बेटियों को देनें में अपनी शान और मर्यादा समझते थे तथा ब्राह्मण हमेशा गुलामी और उनकी शान और मर्यादा बढ़ाते हुए, उनके तलवे चाटता रहा। जब कि उसी समय ब्राह्मणों के विरोध के बावजूद क्षत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना की, वे भी शूद्र जाति के थे।
   संत कबीर, संत रविदास, जिन्होंने अपनी अमृत वाणी से ब्राह्मणवाद पर जबरदस्त कुठाराघात किया। महिलाओं में सावित्री बाई फुले, ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, पेरियार रामास्वामी नायकर, संत गाडगे महाराज, ललयी सिंह यादव, रामस्वरूप वर्मा, जगदेव बाबू और मान्यवर कांशीराम जी, ए सभी महापुरुष शूद्र समाज में ही पैदा हुए थे। करीब 300 सालों तक अंग्रेज़ो ने शासन किया, जिनको ब्राह्मण मलिच्छ (शूद्र) कहा करते थे। जिन्होंने ही आधुनिक, वैज्ञानिक, प्रगतिशील भारत की नीव रखी। स्वतंत्र भारत की या उससे पहले की बात करेंगे तो, बाबा साहेब आंबेडकर जैसे विद्वान भारत में आजतक कोई पैदा ही नहीं हुआ। मैं खुद, शुरुआती पढ़ाई से लेकर, पूरी नौकरी समयाकाल में, यहां तक कि सामाजिक कार्यों में भी हजारों ब्राह्मणों के साथ सम्वंध रहा है और इन सभी से हर कार्यो में नम्बर एक पर रहा हूं। ब्राह्मणवादियो के न चाहते और अंबेडकरवादी रहते हुए भी, अपनी काबिलियत पर, इमानदार और उत्कृष्ट इन्जीनियर के लिए भारत सरकार द्वारा "संचार श्री" एवार्ड से सम्मानित तथा कयी पुरस्कार के साथ साथ, सतर्कता विभाग से भी सम्मानित किया गया हूं। माफी चाहता हूं ! इसे आप लोग मेरा घमंड नहीं, एक शूद्र अहीर का ब्राह्मण से उच्च होने का आत्मविश्वास समझिएगा।
  आजतक भारत का इतिहास सिर्फ हारने का इतिहास रहा है। इस कलंक को धोने और जीतने का सेहरा भी बाबू जगजीवन राम, जो चमार जाति के थे, बंगला देश की लड़ाई में रक्षा मंत्री के रूप में पहली बार इतिहास में जीतने का ताज भी उन्ही को सुशोभित कर रहा है।
   आप खुद आंकलन करें, पूरे इतिहास में ब्राह्मण कहां है, क्या इस वर्ण में कोई भगवान, कोई महापुरुष, कोई विद्वान, कोई वैज्ञानिक पैदा हुआ है। कड़ुआ सत्य है नहीं। नकली, बनावटी, स्वघोषित, अंग्रेजों से मांफी मांगने और गांधी जी की हत्या करने जैसे महापुरुष ज़रूर मिल जाएंगे।
  आठवीं सदी से लेकर आज तक, पश्चिमी सभ्यता (जिनको ए अभद्र कहते हैं) के वैज्ञानिकों ने मानव और पशु-प्राणी के कल्याण और शुख सुविधा के लिए लाखों करोड़ों रिसर्च करते आ रहे हैं और वहीं हमारे देश के मुख से पैदा होने, ब्रह्म को जानने, तथाकथित भगवानों से भी उच्च स्थान पाने वाले ढोंगी पाखंडी, भगवान को भी वेवकूफ बनाने वाले, ज्ञान पैदा करने और बांटने वाले चुन्नीधारी, सिर्फ एक ही रिसर्च, इन्सान को मंदबुद्धि और बेवकूफ कैसे बनाया जाए, सैकड़ों साल से आजतक रिसर्च करते चले आ रहे हैं।
   आज भी इस लोकतंत्रीय देश में, समता समानता और बन्धुत्व रूपी सम्विधान होने के बावजूद, हमारे ही लाखों शूद्र भाइयों को अपने रिसर्च हगवा आईटी सेल में लाखों करोड़ों रुपए उनपर खर्च कर, उनका ब्रेनवाश कर नौकरी पर लगा दिया है। उन सभी को शोसल मीडिया के माध्यम से, नकली, मनगढ़ंत मैसेज, वीडियो, फोटो आदि के माध्यम से हिन्दू-मुस्लिम और शूद्रो की जातियों में ही एक दूसरे से नफरत के बीज बोने के लिए काम पर लगाया हुआ है। कितना भी इनको गाली या अपशब्द से कमेंट करो, फिर भी वेशर्म की तरह मैसेज फारवर्ड करते रहते हैं। क्या करें उनकी भी आजीवका की मजबूरी है, उनकी मजबूरी के प्रति कभी कभी उनके प्रति सहानुभूति भी उमड़ पड़ती है।
   शूद्र साथियों, अब आंखें खोलो, अपने गौरवशाली इतिहास का आंकलन करो, तर्क करो, काल्पनिक पाखंड और अंधविश्वास क्यों और कैसे, आज वैज्ञानिक युग में पहले जैसा क्यों नहीं? यही नहीं अब प्यार से, अन्यथा कान पकड़कर पूछिए, चल बताव, एक ही धर्म, हिन्दू धर्म के इन्सान,इन्सान में, तुम उच्च और मैं नींच कैसे? सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं ऐसी सोच रखने वाले मनुवादी शूद्र भी उतने ही जिम्मेदार है। धन्यवाद।
  आप के समान दर्द का हमदर्द साथी!
           गर्व से कहो हम शूद्र हैं!
         शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
                मो०7756816035