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हम जैसा सोचते है वैसा महसूस करते है, बचपन से हमारे न्यूरॉन्स में जो जानकारी फीड कर दी जाती है वो हमारे unconcious mind में store हो जाती है
April 26, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

आपने फ़िल्म एक्टर अक्षय कुमार की भूल भुलैया, और संजय दत्त की "लगे रहो मुन्नाभाई" देखी होगी, हम जैसा सोचते है वैसा महसूस करते है, बचपन से हमारे न्यूरॉन्स में जो जानकारी फीड कर दी जाती है वो हमारे unconcious mind में store हो जाती है, हम भूत प्रेत चुडैल आत्मा परमात्मा देवी देवता शैतान जैसी अवधारणा अपने दिमाग मे भर चुके बचपन से, अब जब किसी एक पर गम्भीर हो कर चिंतन मनन करते है तो वो आकार साकार रूप ले लेती है जो वास्तविकता में भृम होता है जिसे हम सच मान लेते है, जैसे लोगो के शरीर मे देवी माँ आती है दरअसल वो एक मानसिक बीमारी होती है जो अंधविश्वास के अति होने पर एक तरह का अटैक होता है, schizophrenia कहते है इसे, जोर से डांटने पर देवी माँ भाग जाएगी, इसी तरह लोगों को भूत प्रेत भी आते है शरीर पर, phasmofobia कहते है इस बीमारी को, जिसे मनोचिकित्सक ठीक कर सकते, तंत्र मंत्र से भी यही इलाज होता है ये अहसास दिलाया जाता है मानसिक स्तर पर कि भूत प्रेत भाग गया, जब रोगी मानसिक तौर पर ये मान लेता है तो ठीक भी हो जाता है, ये भी एक मनोविज्ञान है, डर जब ज्यादा हावी होता है तब ये मानसिक बीमारी पागलपन तक बढ़ जाती है, तब डॉक्टर भी फेल हो जाते है, आत्मा जैसी कोई चीज नही होती, आज तक कोइ भी ज्ञानी विज्ञानी आत्मा जैसी अवधारणा को सही साबित नही कर पाया, इसके विपरीत इसे खारिज करने के हजारों पुख्ता प्रमाण है, दिल फेफड़े किडनी लीवर सब ट्रांसप्लांट होते हैं, आत्मा इनमें से किसी में नहीं होती, अगर आत्मा दिमाग मे होती तो दिल और किडनी फेल होने से इंसान मरते नही...Kumar Om Admi