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हमारे लेख "हिन्दू धर्म,वर्ण व्यवस्था, शूद्र एकता मंच"लेख पर एक साथी श्री नंदकुमार जी
April 21, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥छठां एपिसोड,शाम दिनांक19-04-2020🔥
 🔥हमारे लेख "हिन्दू धर्म,वर्ण व्यवस्था, शूद्र एकता मंच"लेख पर एक साथी श्री नंदकुमार जी (मो०-8987384940) की सार्थक प्रतिक्रिया🔥
      बिल्कुल सराहनीय सोच है आपकी, मेरी कामना है कि आप और हम सब अपने मिशन में कामयाब हों, एक बात तो मानना होगा कि ब्राह्मण अपने मिशन में ज्यादा आसानी से कामयाब होता दिख रहा है अपने छली , कपटी स्वभाव के चलते आज़ादी से अबतक शासन व्यवस्था में वही पावर में रहा है , ये कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि कथित शूद्रों के पास अधिसंख्य वोट रहते हुए भी सत्ता में राजनीतिक भागीदारी बहुत कमजोर है, ब्राह्मण हमारे वोट लेकर हमी पर राज कर रहा है, जबकि बाबा साहब का संविधान सबको एक वोट का अधिकार देता है अगर सभी शुद्र एकमत हो जाएं तो ब्राह्मण एक झटके में घुटनो आ पर जायेगा।
   लेकिन हमारी अज्ञानता, धर्मभीरुता जातीय श्रेष्ठता की मूर्खतापूर्ण लालसा  शुद्रों को एक नही होने देती , अगर हम मान लें कि आज देश का मुखिया एक ओबीसी (शास्त्रों के मुताबिक शुद्र) है तो मुखिया जी का करामात देखिए , किस वर्ग का भला कर रहे हैं , ये बात बहुजन बुद्धिजीवी तो समझ रहे हैं और अपने भाइयों को समझाने का तरह तरह से प्रयास कर भी रहे हैं फिर भी अधिसंख्य बहुजन सच्चाई समझने को तैयार नही।
   (हालांकि 2014 के प्रथम शासनकाल में सरकार की बहुजनों के प्रति नीयत साफ हो गई थी) फिर भी अधिकांश बहुजनों ने मुखिया जी को फिर से चुन लिया। अब इसका परिणाम दशकों तक भुगतना होगा ।ऐतिहासिक रूप से भारत बार बार गुलाम होता रहा , इसके लिये कौन जिम्मेदार था? निश्चित रूप से वही लोग जो आज भी अपने आप को योग्य और बहादुर समझते हैं , नकली इतिहास में अपनेआप को बहादुर सम्राट लिखते रहे हैं, भारत के गुलामी में शुद्र कतई जिम्मेदार नही है,शुद्र तो सदियों से छल के कारण सिर्फ रोज़ी रोटी के जुगाड़ में व्यस्त रहा (बुद्धकाल को छोड़कर) पढ़ने नही दिया गया, समाज के मुख्यधारा के क्रियाकलापों में भाग नही लेने दिया गया तो गुलामी जैसी बड़ी घटना का जिम्मेदार कैसे कहलायेगा?  लेकिन अब हमारी सफलता का एक ही मंत्र है बहुजन एकता ........क्रमशः....