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जन्मजाति_आरक्षणधारी_इस_आरक्षण_की_समीक्षा_नही_करता सुप्रीम कोर्ट के जज जिस तरह से अपने आरक्षण को छुपाकर आरक्षण के बारे में समीक्षा कर रहे हैं। 
April 26, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

#जन्मजाति_आरक्षणधारी_इस_आरक्षण_की_समीक्षा_नही_करता
सुप्रीम कोर्ट के जज जिस तरह से अपने आरक्षण को छुपाकर आरक्षण के बारे में समीक्षा कर रहे हैं।

लोग कह रहे हैं कि अपनी आत्मा से पूंछो कि वास्तव में हमें आरक्षण की जरूरत है। लेकिन इस बात पर आरक्षण विरोधियों की आत्मा कभी नही कहती कि देश में जातिगत भेदभाव जाति के आधार पर होता है, लेकिन उन्हें 26 जनवरी 1950 से पहले से जमा उनकी जमापूंजी उनके दादा परदादा ने इन्ही SC/ST के खून पसीने से छीनकर अर्जित की, इस दादा परदादा की अर्जित जमा पूंजी का बराबर से बंटवारे पर भी समीक्षा होनी चाहिए। 

SC/ST को संपत्ति जमा और जमीन का अधिकार आजादी के बाद ही मिला। उससे पहले उन्हें पहले उन्हें खाना पानी पीने तक का अधिकार नही था। 

आरक्षण विरोधियों को SC/ST और ओबीसी को गुलाम बनाकर उनसे गुलामी करवाकर उनसे 6 हजार सालों से ज्यादा समय से अपने पास सम्पत्ति अर्जित की लेकिन मात्र 70 साल से भेदभाव वाले आरक्षण में अर्जित संपत्ति की तुलना 6 हजार से करके करेंगे। 

आरक्षण विरोधी कभी जाति भेदभाव का विरोध नही करते। कहते हैं कि आरक्षण हटाने से गरीबों को फायदा मिलेगा। लेकिन उन्हें यह नही बताते हैं कि आरक्षण के अलावा देश की सरकारें देश में गरीबी उन्मूलन के लिए कई योजनाएं पहले से ही काम कर रही हैं। क्यों आज तक आरक्षित सीटों को उनके अनुपात के हिसाब से नही भरा गया है। अगर आरक्षण को ईमानदारी से लागू करते तो आज 70 सालों में स्थिति कुछ और होती।