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Lic का वजट
February 3, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

पूरे देश को जिस पल का इंतजार था वो पल ऐसे बीता जैसे मेरी स्नातक के 3 घंटे की पेपर बीती दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आई और उन्होंने बजट पेश किया। हां, बजट में कई बातें थी लेकिन जिस बात से मैं सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ वो मैं आपको आज बताऊंगा। दरअसल मोदी जी मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि जो चीज मोदी जी को पसंद नहीं आती है वो उसको बेच देते हैं, लेकिन इस बार मोदी जी ने ऐसा नहीं किया है। मोदी जी ने कान को घुमा कर पकड़ा है इस बार। वो किसी चीज को बेच नहीं रहे हैं बस बुद्धिमानी से पैसा बटोर रहे हैं। हालांकि एयर इंडिया को पूरा बेचने का मन बना लिया गया है, आईडीबीआई बैंक को भी पूरा बेचने का मन बना लिया गया है और भारत पेट्रोलियम को भी लेकिन जिंदगी के साथ भी और जिंदगी के बाद भी वाले टैगलाइन, भारतीय जीवन बीमा निगम जिसमें सरकार की 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी है उसको सरकार बीच नहीं रही है लेकिन आईपीओ के तहत उसे शेयर बाजार में रजिस्टर कराएगी और उसमें लोगों से पैसे लगवाएगी। जैसे आईआरसीटीसी के लिए सरकार ने किया। अब कितनी फीसदी के लिए लोग शेयर मार्केट में लड़ाई करेंगे ये अभी क्लियर नहीं है, क्योंकि वित्त मंत्री ने ऐसा कुछ भी बताया नहीं। बस उन्होंने ये बताया कि आईपीओ, जिसको हम इनिशियल पब्लिक आफरिंग कहते हैं उसके तहत एलआईसी शेयर बाजार में रजिस्टर्ड होगा और उसके बाद सरकार के तय परसेंटेज के मुताबिक लोग उसमें पैसा लगा सकेंगे।

एलआईसी अपने आप में ही एक भरोसे का नाम है। ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि अगर एलआईसी अभी शेयर बाजार में रजिस्टर्ड हो जाता है तो वो सबसे बड़ा कंपनी बन जाएगा। फिलहाल अगर एलआईसी की संपत्ति की बात करें तो एलआईसी के पास 36.65 लाख करोड़ की संपत्ति है। एलआईसी हर साल लगभग 20 लाख पॉलिसीज करता है, 29 करोड़ पॉलिसी एलआईसी का फिलहाल है और हर साल तकरीबन 3 लाख करोड रुपए प्रीमियम के तौर पर एलआईसी में जमा होते हैं। एलआईसी के इतिहास में जाएं तो 19 जनवरी 1956 को एलआईसी का राष्ट्रीयकरण हुआ और वो सरकारी बीमा कंपनी बन गई, जिसमें 100 फीसदी हिस्सा अभी सरकार का है। फिलहाल एलआईसी के 8 ज्ञान ऑफिस है, 113 डिविजनल ऑफिस है, 1381 सेटेलाइट ऑफिस है। एलआईसी के बादशाहत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अभी मार्केट में जितनी भी बीमा पॉलिसीज है उसमें 66.24 फीसदी हिसाब एलआईसी का ही है। एलआईसी को भरोसे का दूसरा नाम समझा जाता है और 2018- 19 मैं एलआईसी के सरपलस को देखें तो वो 532 अरब रुपए हो गया था। ये सब बातें मैं आपको इसलिए बता रहा हूं क्योंकि जिस  सरकार की 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी एलआईसी में है और एलआईसी इतना ज्यादा कमा रहा है, मतलब फायदे का सौदा है, फिर भी सरकार उसे बेचने पर तुली हुई है। अब सरकार एलआईसी में लोगों से पैसे इन्वेस्ट करवाएगी और उन पैसों से अपना कुछ काम करेगी। जैसा कि मैं पहले बता चुका हूं कि अभी सरकार ने ये नहीं बताया है कि कितने पर्सेंट के लिए शेयर बाजार खोला जाएगा।

एलआईसी में सिर्फ खूबियां ही नहीं है, कुछ खामियां भी हैं, लेकिन इन खामियों से पहले आप ये जान लीजिए कि ये खामियां पिछले 5 सालों में ही ज्यादा उभर कर सामने आई है। पिछले 5 सालों में एलआईसी का एनपीए, यानी कि नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट दोगुना हो गया है और दोगुना होकर 30,000 करोड हो गया है। पिछले 5 सालों में ऐसा क्या हुआ की एलआईसी का एनपीए इतना बढ़ गया ये तो सरकार ही बता सकती है, लेकिन मूलभूत कारण हम आपको ये बता सकते हैं कि एलआईसी से लोन लिया गया और वापस नहीं किया गया। इसका कारण आईडीबीआई बैंक भी है क्योंकि 2019 में एलआईसी ने 21 हजार करोड रुपए आईडीबीआई बैंक में इन्वेस्ट करके उसका 51 फ़ीसदी हिस्सेदारी खरीदा थी लेकिन आईडीबीआई बैंक डूब गई।  एक सवाल ये भी है कि जब एलआईसी में सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है तो सरकार ऐसी जगह निवेश करती है क्यों है जहां पर घाटा हो। एलआईसी में पैसा लोगों का है, उन लोगों का है जो किसान हैं, जो दिन भर नौकरी करते हैं और बची कुची आमदनी को लाकर जमा कर देते हैं और उन पैसों का अगर सरकार दुरुपयोग करें या डूबा दे तो आप ही सोचिए कि क्या होगा।

अभी एलआईसी में सीधे तौर पर 2,85,019 कर्मचारी काम करते हैं और अगर एजेंट की संख्या की बात करें तो 21 लाख 94 हजार एजेंट एलआईसी से जुड़े हुए हैं। अब 1 फरवरी को बजट पेश करने के दौरान जैसा कि हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि एलआईसी को आईपीओ के तहत वो शेयर बाजार में लाएंगी और कुछ हिस्सेदारी बेचेंगी तो देखना होगा कि इससे क्या होता है, क्योंकि सरकार ने अभी साफ नहीं किया है कि कितनी हिस्सेदारी बेची जाएगी आगे की प्रक्रिया क्या होगी।