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मानवाधिकारों और मानवता की जय हो, एव राष्ट्रवाद/तानाशाही की क्षय हो
May 9, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

💪🙏मानवाधिकारों और मानवता की जय हो,💪🙏
 ☠️☠️राष्ट्रवाद/तानाशाही की क्षय हो💀💀
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        मैं दो कौड़ी का फ़ेसबुकिया लेखक हूँ तो मुझे ब्लॉक करने की कोशिश क्यों हो रही है. मेरे पोस्टों को हटाया क्यों जा रहा है. जब लीखने से कुछ नही होता तो राष्ट्रवादी सरकारें को हम जैसे मामूली लेखकों से चिढ क्यों है ?

राष्ट्रवादी सरकारें सिर्फ लीखने से नही गाना गाने से भी भयभीत हैं. उन्हें आज़ादी से लिखना, गाना गाना, बोलना भी पसंद नही है. राष्ट्रवादी सरकारें आपके विचारों पर भी नियंत्रण करना चाहती हैं !

कल इब्राहिम गोकसेक की लंबे आमरण अनशन के कारण मौत हो गयी. अरब और यूरोप के न्यूज़ चैनलों ने इस खबर को जगह दी. कौन हैं इब्राहिम गोकसेक ?

टर्की के एक म्यूजिक बैंड के सदस्य. जो अपने गानों में कभी कभी सरकार की नीतियों का विरोध करते. बैंड बाजा के सदस्यों के हाथों में गिटार ड्रम था, लेकिन सरकार ने कहा इनके हाथो में बंदूक है बम है !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह राष्ट्रपति रेसेप तैयिब एर्दोगान को आज़ाद आवाज़ पसंद नही है. टर्की सरकार ने बैंड पर पाबंदी लगाकर, पूरे बैंड के सदस्यों को मार्क्सवादी संगठनों से जुड़े होने के आरोप में जेल में डाल दिया. टर्की की कोर्ट ने सरकारी फैसलों पर मुहर लगा दी ! 

इब्राहिम गोकसेक और बैंड की अन्य सदस्य हेलिन बोलेक ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए आमरण अनशन शुरू किया. 224 दिनों के बाद 3 अप्रैल हेलिन की मौत हो गयी और 323 दिनों तक चला इतिहास का लंबा आमरण अनशन में कल 7 अप्रैल को इब्राहिम गोकसेक की मौत हुई !

आप पूछ सकते है गांधी ने कभी इतना लंबा आमरण अनशन क्यों नही किया. 21 दिनों का लंबा आमरण अनशन चला था वो किसी को मिला अधिकार छीनने के लिए. पूछिये कभी अन्ना हजारे से आमरण अनशन पर क्यों नही है, क्या अब सब ठीक है ?

दुनिया में आज जितने भी राष्ट्रवादी नेता हैं सभी की कार्यशैली एक है. आज़ाद आवाज़ को कुचलना, मिडिया कोर्ट को अपने कब्जे में रखना. कोई जुर्रत करे तो उन्हें अर्बन नक्सल बताकर आनंद तेलतुंबड़े की तरह जेल में डाल देना. 

कपिल मिश्रा, अर्णब गोस्वामी और संभाजी भिड़े जैसे दंगाईयों को पालना ताकि सांप्रदायिक प्रोजेक्ट चालू रहे. इसकी आड़ में राष्ट्रवादी नेता उद्योगपतियों का 68,000 करोड़ क़र्ज़ माफ़ कर गरीबों को भूखा मरने को छोड़ रहे हैं !

एक बात आप लोग समझ लीजिए राष्ट्रवादी नेता कोई मजबूत नेता नही होते जैसा मिडिया इन्हें प्रोजेक्ट करता है. यह लोग बहुत कमजोर होते हैं पूंजीपतियों से बहुत डरते हैं, पूंजीपतियों के खिलाफ जाने की इनकी हिम्मत नही है. सारा बोझ मध्य वर्ग और गरीब आदमी पर डालते हैं !

भारत में भी इब्राहिम गोकसेक हेलिन बोलेक जैसी आज़ाद आवाज़ों को मोदी सरकार ने दंगाई, माओवादी, अर्बन नक्सली बताकर जेल डाल दिया है. ताकि अडानी अंबानी की सेवा करने में कोई बाधा उत्पन्न ना हो !

क्या मेरा यह सब लिखना पूंजीपति के नौकर राष्ट्रवादी नेताओं को पसंद आएगा ?

✍Kranti Kumar