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महाराष्ट्र सरकार न्यू
November 24, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

महाराष्ट्र की घटना इस देश के इतिहास में याद की जाएगी जिस रूप से एनडीए गवर्नमेंट और विशेष रूप से बीजेपी ने जो खेल खेला है रात के अंधेरे में जितनी निंदा करें उतनी कम है। पता नहीं कब तो राज्यपाल ने मैसेज किया कैबिनेट को, कब कैबिनेट की मीटिंग हुई, कब राष्ट्रपति महोदय को मैसेज गया और सुबह 5:45 पर फैसला हुआ, सुबह के 5:45 फैसले हुए, 8:00 बजे शपथ दिलाई गई यह जरूरत क्या थी? अगर मान लो कन्विंस हो गए राष्ट्रपति, राज्यपाल महोदय तो कोई दिक्कत नहीं थी दिन में शपथ हो सकती थी, सबको इतला करते, ढोल-नगाड़े बजते, जो लोग मुंबई में थे आते वहां पर शपथ ग्रहण के गवाह बनते दिक्कत क्या थी? रात के अंधेरे में छिपकर के ऐसी कौन सी चिंताये सता रही थी मोदी जी को, अमित शाह जी को, बीजेपी के नेताओं को कि रात के अंधेरे में यह फैसले किए गए, जितनी निंदा करें उतनी कम निंदा है। दूसरा में कहना चाहूंगा अब यह गिल्टी कॉन्शियस हो गए हैं मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम, यह क्या काम कर पाएंगे, क्या जनता की सेवा कर पाएंगे, नंबर 3 गवर्नर साहब को एक भूमिका होती है ऐसे वक्त में और जो गवर्नर पद की शपथ लेता है वह किसी पार्टी पॉलिटिक्स में नहीं होता है, वह राजनीतिक पार्टी छोड़ करके निष्पक्ष होने की शपथ लेता है, संविधान की शपथ लेकर के राज्यपाल महोदय कुर्सी पर बैठते हैं उन्होंने किस रूप से बीजेपी नेताओं से षड्यंत्र करके, बीजेपी के अध्यक्ष जी से, अमित शाह जी से, मोदी जी से किस प्रकार सलाह करके, एक षड्यंत्र करके उसके बाद में जिस रूप से शपथ दिलाई गई वह भी निंदनीय है और नैतिक रूप से राज्यपाल महोदय को अपनी कुर्सी पर रहने का कोई अधिकार नहीं रहा है यह मेरा मानना है।

सवाल: सर एनसीपी को उन्होंने तोड़ा है, अहमद पटेल ने कहा है इतिहास में यह घटना काली... 
जवाब: जब मैं कह रहा हूं आपको उसके मायने वो ही है जो वह कह रहे हैं, पूरा देश देख रहा है क्या हो रहा है देश के अंदर इसलिए मैं कहना चाहूंगा इस घटना के बाद में वैसे जनता ने संदेश दे दिया था महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव के बाद में जनता क्या चाहती है, एक संदेश देने का प्रयास किया तब भी, तब भी बीजेपी सम्भली नहीं है इस घटना के बाद में बीजेपी की इस देश में उल्टी गिनती शुरू हो गई है यह मेरा मानना है।

सवाल: सर एनसीपी के कुछ विधायकों को तोड़कर वह दिल्ली लेकर आए हैं, क्या कांग्रेस अपने विधायकों को जयपुर लाएगी....
जवाब: अगर विधायक लोग आते हैं हम स्वागत करेंगे उनका, हमारा फर्ज बनता है की सरकार डेमोक्रेसी के आधर पर  फैसले हो और हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है उसको बचाने का प्रयास हो तो पहले भी जब यहां पर विधायक आए थे, कांग्रेस के लोग आए थे, अब भी आए तो उनका स्वागत है हमारी तरफ से, हम चाहेंगे पूरी तरह कोई पार्टी के विधायक आएंगे यहां पर तो हम लोग क्योंकि सरकार में बैठे हुए हैं, हमारा फर्ज बनता है उनकी रक्षा करने का, उनकी सुरक्षा करने का, चाहे कोई पार्टी के हो।

सवाल: अहमद पटेल और शरद पवार जी ने कहा है कि हम लोग सरकार बनाएंगे....
जवाब: मेरा मानना है कि पहली बात तो इमीडिएटली राष्ट्रपति महोदय को हस्तक्षेप करना चाहिए, इतनी बड़ी घटना उनके नाम से हुई है, राष्ट्रपति महोदय की स्टांप लगी है इसलिए अब इनको time-bound समझ लेना चाहिए अगले 3 दिन के अंदर, 5 दिन के अंदर इनको शपथ दिला करके अपना बहुमत साबित करें नंबर 1 और नंबर दो जिस प्रकार से आनन-फानन में किया गया है उसकी जरूरत क्या थी, यह राष्ट्रपति महोदय को खुद को बताना पड़ेगा, पूछना पड़ेगा क्योंकि वह तो गवर्नर और राष्ट्रपति तो चलते हैं सलाह से कैबिनेट की सलाह से चलते हैं तो मंत्रीमंडल ने जो फैसला किया है वह क्यों किया है मैं समझता हूं कि राष्ट्रपति महोदय जी खुद चाहेंगे कि पता करे क्यों किया गया है रात के अंधेरे के अंदर मेरा मानना है।

सवाल: कांग्रेस गांधीवादी तरीके में रह गई पीछे से तोड़फोड़ हो गई....
जवाब: गांधीजी के म्यूजियम में मैं आया हुआ हूं, बहुत शानदार म्यूजियम बना है मैं साधुवाद देता हूं मिस्टर पारीक, खादी बोर्ड की जो संस्था है उसको बहुत शानदार, समय पर, 150 वर्ष चल रहे हैं गांधी जी के जन्म के और हमारी सरकार 1 साल तक और मना रही है उसके दरमियान इतना शानदार म्यूजियम बनना बहुत कम समय में यह साधुवाद के पात्र हैं, बधाई के पात्र हैं। जनता को आकर देखना चाहिए इसको और मैं चाहूंगा कि लोग प्रेरित हो इस प्रकार के म्यूजियम राजस्थान में और जगह बने यह मैं समझता हूं कि उपयुक्त होगा राजस्थान के लिए, राजस्थान वासियों के लिए।

सवाल: सर 2 दिन का विधानसभा सत्र चल रहा है, उपाध्यक्ष पद का भी चुनाव.....
जवाब: 28 और 29 तारीख को दो दिवसीय विधानसभा का सत्र बुलाने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें संविधान को लेकर के जो भारत सरकार की भी एडवाइजरी थी राज्यों को और डॉक्टर अंबेडकर साहब की भावनाओं को, उनके विचारों को, उनके बनाए हुए संविधान को सामने रख करके हम लोग डिस्कस कर सकें, लेखा-जोखा कर सकें कि देश में 70 साल में संविधान के आधार पर सरकारे चली है उसके नतीजे क्या रहे हैं, संविधान की भावनाओं के अनुकूल किस प्रकार काम होना चाहिए जो कि देश के लिए आवश्यक भी है, जनहित के अंदर भी है तो मैं समझता हूं कि अच्छी बहस होने की संभावना है विधानसभा के अंदर।
धन्यवाद नमस्कार।