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मण्डल कमीसन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 31 वकील क्या तैयार किये जाने आप
November 21, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

पोस्ट लम्बा है साथीयो पढ़ना जरूर
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#पिछडों को लालू यादव जी का क़र्ज़ उतारने में वक़्त लगेगा

लालू यादव जी बिहार के मुख्यमंत्री थे ।

 सुप्रीम कोर्ट में मंडल ( पिछड़ों का आरक्षण ) मामले पर बहस चल रही थी । 

''"मंडल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के 31 ब्राह्मणवादी वकील मुफ्त में ही पैरवी कर रहे थे  ।""

लालू ने ब्राह्मणवादी वकीलों से मंडल की पैरवी करने को कहा  ।

 मगर एक भी ब्राह्मणवादी वकील तैयार नहीं हुआ ।
 लालू जी ने यहाँ तक कहा कि अगर आप एक केस के 1 लाख लेते हो तो हमसे 2 लाख लेकर मंडल की पैरवी कर दो ।
 फिर भी कोई ब्राह्मणवादी वकील तैयार नहीं हुआ ।

 अंत में लालू जी ने "राम जेठ मलानी " को तैयार किया ।
 मगर जेठमलानी सिविल मामलों के एक्सपर्ट नहीं थे , वे आपराधिक मामलों के एक्सपर्ट थे  ।
इस तरह लालू की पैरोकारी की बदौलत सुप्रीम कोर्ट से पिछड़ों को 27 % आरक्षण मिला ।
 मगर यहाँ भी पिछड़ों के साथ एक चालाकी हुई । 
52%obc को 27 % आरक्षण तो मिला मगर क्रीमी लेयर के बंधनों के साथ ।

"लालू प्रसाद यादव जी" के नाम मात्र से सामन्तवाद की रूह कांप उठती है......

         लोग कहते हैं कि ""हनुमान चालीसा''" पढ़ने से ""भूत-प्रेत"" भाग जाते हैं ।
अब यह तो निश्चित नही है कि कोई भूत-प्रेत है या नही अथवा हनुमान चालीसा पढ़ने से ऐसा कोई चमत्कार हो जाता है या नही पर यह तो निश्चित है कि वर्तमान सन्दर्भ में लालू प्रसाद यादव जी का नाम ऐसा नाम है जिसके उच्चारण मात्र से ""शोषण करने वाले 'अभिजात्य - समाज"" का रोम-रोम फूट जाता है । 
अन्यायी मीडिया अपनी सारी मर्यादा भूल जाती है,साम्प्रदायिक ताकतें बिलबिला उठती हैं। सामाजिक न्याय विरोधी शक्तियां हाँफने और कांपने लगती हैं।  लालू नाम ही इन धनजोर,मनजोर,बलजोर शक्तियों को कँपकँपी ला देता है क्योंकि यह लालू जी
तनहीन, 
मनहीन,
बलहीन,
धनहीन लोगो की ताकत है,आवाज है और संघर्ष का प्रतीक है।
       लालू प्रसाद यादव जी ""शोषक- तबकों "" को गढ़ते हैं क्योकि वे पीड़ितों के लिए लड़ते हैं ।सामंतवादियों को चुभते हैं , क्योकि वे "सामंती - सत्ता " को चोटिल करते हैं,साम्प्रदायिक लोगो को धँसते हैं क्योकि वे इन्हें छेड़ते हैं । पीड़ा देने वालो को अंदर तक सालते हैं , क्योकि वे इन्हें ललकारते हैं । ऐसा हो भी क्यो नही क्योकि लालू जी तो लालू हैं । लालू न झुकते हैं और न रुकते हैं । लालू जी को चाहे जितना दबाओ पर  लालू जी"ललकार" हैं, "हुंकार " हैं और आंदोलन हैं।
       लालू प्रसाद यादव जी को इस देश का 'मुंहजोर - तबका " किसी कोण से बख्शा नही है पर लालू जी भी न हारे हैं और न थके हैं । लालू जी एक अपराजेय योद्धा की तरह अनवरत लड़ते रहे हैं और जंग फतह करते रहे हैं।
        इस देश का अभिजात्य समाज लालू जी को क्या-क्या नही कहा और साबित किया है पर लालू जी ने निश्चिंत भाव से सदैव दलितों,
पिछडो और 
अल्पसंख्यकों के हित में आवाज बुलंद की है,भले ही इसके एवज में उन्हें बहुत कुछ खोना पड़ा है लेकिन लालू जी न थके,न हारे और न निराश ही हुए हैं।
         पटना विश्व विद्यालय का प्रेसीडेंट और कमेरे समुदाय का लोकतंत्र सेनानी जिसने देश मे तानाशाही के विरुद्ध सँघर्ष करते हुए अपना यौवन जेल में बिताया उसे अहीर होने की सजा भुगतनी पड़ी है।देश की अभिजात्य पोषक मीडिया लालू को चाराचोर सिद्ध करने में पूरी ताकत झोंक डाली।जिस लालू जी ने चाईबासा में स्कूटर के नम्बर पर ट्रक चलाने का फर्जीबाड़ा पकड़ा,मुकदमा लिखवाया,वही लालू चारा घोटाले के मुजरिम बना दिये गए।जगन्नाथ मिश्रा साहब के समय घोटाला हुवा और मुजरिम लालू जी भी बना दिये गए।एक ही अपराध में लालू जी को जेल और जगन्नाथ मिश्रा जी को बेल हो गयी।अद्भुत है यह इंतजाम जिसमे मिश्रा को बेल तो यादव को जेल हो जाता है।
          लालू जी से अनायास ही मुंहजोर लोग नही जलते हैं,उसके पीछे कारण है क्योंकि लालू जी गलजोर लोगो की दवा हैं।लालू जी के शब्दो मे परमाणु बम सदृश विस्फोट है।लालू जी ने अपने राजनैतिक अभ्युदय काल मे जो ऐतिहासिक कार्य किये है वे देश की यथास्थितिवादी ताकतों के लिए नासूर है।लालू जी ने रामरथ रोक के देश की कम्युनल ताकतों को खुलेआम चुनौती दे डाली थी तो वहीं उन्होंने खुद को सोशल जस्टिश के मुद्दे में झोंक डाला था।मण्डल की लड़ाई को फतह करने के लिए लालू जी ने रामजेठमलानी जैसे ख्यातिप्राप्त वकील को खड़ा कर पिछड़े वर्गों को हक़ दिलाने की जोरदार पहल कर सम्पूर्ण सामाजिक न्याय विरोधी ताकतों को चुनौती दे डाली थी।
         कमेरे वर्गो को उनकी ताकत का अहसास दिलाने के लिए लालू जी कुर्ता के ऊपर बनियान पहन के सभाओं में जाते थे।सभा मे जुटी भीड़ लालू जी के इस अनोखे अंदाज पर खूब लोटपोट होती थी लेकिन जब लालू जी इस अनोखे पहनावे की ब्याख्या करते थे तो उसकी गूढ़ता का क्या पूछना?लालू जी कहते थे कि ऐ!शोषित-पीड़ित लोगों!यह बनियान हमेशा नीचे रहता है,पसीना खाता है और इसी की बदौलत कुर्ता और जैकेट इतराता है लेकिन बनियान को कभी भी तवज्जो नही मिलती है।यह लालू अब कुर्ता और जैकेट को नीचे तथा बनियान को ऊपर उठाने का संकल्प लेकर आपके बीच आया है।
        लालू जी की 1990 के बाद  की कोई सभा बिना विवाद के सम्पन्न नही हुई क्योकि लालू जी खरखोंच के बोलते थे।लालू जी बेलाग,बेलौस यथार्थ कहते थे और सामाजिक न्याय के लिए सतत संघर्ष करते थे।लालू जी की इसी अदा ने अन्य पिछड़े-दलित नेताओ की तुलना में उन्हें सर्वाधिक लोकप्रिय बनाया तो सामंती ताकतों का सबसे बड़ा प्रतिरोधक और मुखालिफ भी और यही कारण था कि देश की अभिजात्य समर्थक मीडिया,प्रशासनिक मशीनरी और दीगर ताकते उनको अपने दुश्मन की तरह ट्रीट कीं।लालू जी देश भर के चैतन्य समाज के आंख की किरकिरी बने तो वह तबका जिसके लिए लालू जी खलनायक सिद्ध किये गए उसने भी उनके ऊपर कहानियां बना डाली।बड़ा कठिन है भारतीय वर्ण व्यवस्था में इस जातिगत/वर्णगत अन्याय का प्रतिकार करना।
      लालू जी ने एक बार ब्राह्मणवाद की खिल्ली उड़ाते हुए लालकिला के मैदान में कहा था कि ब्राह्मणवाद हमारे रोम-रोम में बसा हुआ है।जनेऊ पहनने वाले श्रेष्ठ तो जनेऊ न पहनने वाले को निम्न माना जाता है।उन्होंने कहा था कि कान पर जनेऊ लपेटके कुछ लोग छुल-छुल पेशाब करते हैं जबकि मैं बिना कान पर जनेऊ लपेटे हद-हद,हद-हद मूतता हूँ।लालू जी के इस व्यक्तव्य में कुछ लोग भद्दगी तलाशेंगे लेकिन लालू जी के इस ठेठ बोल में पाखण्ड,अंधविश्वास और ब्राह्मणवाद पर करारा प्रहार है।लालू जी पोथी-पतरा फूंकने,मठों और मंदिरों की जमीन गरीबो में बांटने की बात कह एक नयी क्रांति का आगाज किये थे जिसे मनुवादियो ने उन्हें अपने मकड़जाल में फँसाके गुम सा कर दिया।
        लालू जी साम्प्रदायिकता के सबसे बड़े मुखालिफ के रूप में देश मे जाने जाते हैं।लालू जी ने आडवाणी जी के अश्वमेध के घोड़े सरीखे रथ को रोक के देश ही नहीं वरन दुनिया मे एक ऐसा झंडा गाड़ दिया था जिसे हाल-फिलहाल शायद ही कोई दूसरा दुहरा पाए।लालू जी ने अकेले अपने वैचारिक प्रतिबद्धता और उस पर पूरी अक्खड़ता से कायम रहते हुए मोदी जी के कथित मोदी लहर को बिहार में फुस्स कर यह दिखा दिया कि लालू में अभी बहुत दम है।मोदी जी बिहार में हांकते रह गए पर लालू जी के सामने उनकी एक न चल सकी।लालू जी ने बिहार में मोदी जी को ऐसी पटखनी दी कि वे यूपी में जीत कर उससे उबर पाए हैं।
        लालू जी पर उनकी अक्खड़ता,सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता एवं सेक्युलर प्रबृत्ति के कारण बराबर हमले होते रहते हैं।लालू जी के चरित्र हनन से लेकर उनके राजनैतिक जीवन पर कई-कई बार ग्रहण लगाए गए हैं पर लालू हैं कि एक नई स्फूर्ति के साथ हर बार  बाहर निकल आते हैं।पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से  जोड़ के लालू जी की छबि को धूमिल करने की कुचेष्टा साम्प्रदायिक ताकतों के इशारे पर शुरू है लेकिन जनता सब जानती है।यह मीडिया लालू जी के ऊपर कीचड़ उछालने का कोई प्रयत्न छोड़ती नही है लेकिन लालू जी अपनी सामाजिक न्याय एवं सेक्युलरिज्म की प्रतिबद्धता से कभी किनारा नही करते हैं।लालू जी ने यदि अपने दल के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से बात कर लिया तो वह इशू बनता है लेकिन अमित शाह जी का अपराध उनके लिए स्वर्ण पदक होता है।लालू जी राजनेता होते हुए अपराधी सरीखे देखे जाते हैं जबकि केशव मौर्य जी दर्जनों आपराधिक मुकदमो में फंसे होने के बावजूद रामभक्त हैं।
         लालू जी पर किसी भी तरह का हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।लालू जी हम सबके नायक है,सामाजिक न्याय के मजबूत अलमबरदार हैं।हम सभी लालू जी के मुहिम को और तेज बनाएं और लालू जी के मिशन पर आगे बढ़ें वरना देश एक नए फासीवाद में फंस जाएगा !