ALL Image PP-News IBBS EPI PARTY Company MORCHA LIC & Job's SYSTEM
मनुस्मृति अच्छी क्यों लगती है जाने
November 20, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

मनुवादियों को मनुस्मृति बहुत प्यारी है तभी तो पुनः लागू करने की तैयारी है।

ध्यान से पढ़ो एक मनुवादी के मन की बात

मनुवादियों का कहना है कि जब मनुस्मृति लागू थी तो हमारी मौजबाहार थी  !

एकलव्य का अंगूठा काट डाला,
कोई विरोध नही !

शम्बूक का सिर काट डाला,
कोई विरोध नही ! 

गर्भवती महिला को जंगल में छोड़ा तब भी
कोई विरोध नही !

मृत पति की लाश के साथ जीवित पत्नी को भी जलाकर सती बना डाला
कोई विरोध नहीं !

अपनी हवस मिटाने के लिए छोटी छोटी बालिकाओं को भी देवदासी बना डाला,
तब भी कोई विरोध नहीं !

अच्छे भले इंसानों के गले में मटकी और कमर में झाडू बांधकर उन्हें अछूत बना डाला,
कोई विरोध नहीं।

वेद वाक्य सुनने पर कानों में पिंघला हुआ शीशा और वेद वाक्य का उच्चारण कर लेने पर जीभ तक को काट डाला फिर भी कोई विरोध नहीं।

जिन तालाबों में भेड़ बकरी एवं कुत्ते बिल्ली तक पानी पी सकते थे, उन तालाबों तक में  पानी पीना अपराध घोषित कर डाला, तब भी कोई विरोध नहीं।

मरे हुए जानवरों से लेकर इंसानों का मल मूत्र तक सिर पर उठाने को मजबूर कर डाला, फिर भी कोई विरोध नहीं।

अस्त्र शस्त्र एवं शिक्षा से वंचित कर अपना गुलाम तक बना डाला, फिर भी कोई विरोध नहीं।

लेकिन मनुस्मृति के हटने एवं डॉ अम्बेडकर द्वारा लिखे संविधान लागू होने के बाद  सब बर्बाद हो गया!

जिधर देखो उधर विरोध ही विरोध,
 हैदराबाद में रोहित वेमुला की मौत पर विरोध।
गुजरात का ऊना कांड पर विरोध।
 दादरी अकलाख कांड पर विरोध।
 अलवर पहलू खान कांड पर फिर विरोध।
 2 अप्रैल SC,ST एक्ट को लेकर भारत बन्द के माध्यम से नाक में दम कर देने वाला विरोध।
 युनियर्सिटीज में न्यू रोस्टर लागू होने पर भी भयंकर विरोध।
और अब EVM को लेकर 
चारो ओर विरोध किया जा रहा है ये सब हमारे बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है।

जो लोग हमारे नजदीक भी नही बैठ सकते थे, 
वे मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति की कुर्सी पर जा बैठे।

जो लोग हमारे घरों के सामने से गुजरते समय अपने जूते पहनकर नहीं चल सकते थे वे आज कार में बैठकर चल रहे हैं।

जिनकी हमारे सामने बोलने की हिम्मत नही होती थी,
वे लोग आज प्रोफेसर बनकर हमें लेक्चर दे रहे हैं !

पानी तो क्या बल्कि जिन्हें मटके को छूने तक नहीं दिया जाता था उन्हें चपरासी बनकर अपने हाथों से पानी पिलाना पड रहा है। 

जिनको घर में नही घुसने दिया जाता था, 
वे लोग विधान सभा और संसद में घुस रहे हैं ! 

जिनको नौकर तक नही बनने दिया जाता था, 
वे IAS,IPS,IRS, डॉक्टर, इंजीनियर और जज तक बन रहे हैं ! 

हाय रे संविधान.... तूने तो सब बर्बाद कर डाला !

लेकिन हम भी चैन से बैठने वाले नहीं  हैं, सुबह सुबह की सुहावनी नींद को छोड़कर रोज शाखाओं में जाते हैं वहां वापिस मनुस्मृति लागू करने की तैयारी में जुट जाते हैं क्योंकि मनुस्मृति हमें प्राणों से भी ज्यादा प्यारी है तभी तो डॉक्टर अम्बेडकर के संविधान को हटाकर वापिस मनुस्मृति लागू करने की पूरी तैयारी है।

(एक मनुवादी के मन की बात)

*जय विज्ञान जय संविधान*

Dr p s bauddh Editor journal power post news