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मनुवाद और अम्बेडकरवाद
May 4, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥11वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 22-04-2020🔥
🔥 मनुवाद और अम्बेडकरवाद🔥
🔥 ब्राह्मणवाद और शूद्रवाद🔥
    साथियों ब्राह्मणवाद (मनुवाद) इतना कमजोर नहीं है कि कोई जादू की छड़ी चलाएगा और वह खत्म हो जाएगा। जबतक इस देश में ब्राह्मण रहेगा, तबतक ब्राह्मणवाद भी रहेगा और प्रतिक्रिया में अंबेडकरवाद को भी अब कोई खत्म नहीं कर सकता है।
   वाद कुछ नहीं एक विचारधारा है, व्यक्तिपूजा या भगवान पूजा नहीं है। ब्राह्मण भी अंबेडकरवादी हो सकता है और शूद्र तो मनुवादी होता ही है। यह इतना गहरा होता है कि इसको किसी पैमाने पर नापना मुमकिन है। हर इंसान के ब्लड हार्मोन्स में, ऊंच-नीच, जात पात, छुआछूत, पाप-पुण्य और सुख-दुख की विडंबना के साथ घुस गया है। इसमें सुधार लाने के लिए सैकड़ों साल से न जाने कितने महापुरुषों ने कोशिश की और अपने जिन्दगी दांव पर लगा दी है। कुछ की हमें अभी तक जानकारी मिली है। कबीर, रहीम, संत रविदास, पेरियार, फुले, शाहूजी बाबा साहेब, ललई सिंह यादव, डा० रामस्वरूप वर्मा, जगदेव बाबू, कांशीराम आदि अनेक, लेकिन उसका परिणाम आप के सामने है। बाबासाहेब ने अपने जमाने के सभी धर्मों के धर्मग्रंथों, कथा कहानियों आदि को समझते हुए, उस समय के महापुरुषों के अनुभवों, ज्ञान और उनके कार्य को हासिल करते हुए एक अपना विचार दिया। मनु के संविधान को जलाकर, इस देश को समता, समानता और बन्धुत्व की विचारधारा देकर, ब्राह्मणवाद के विरोध में भारतीय संविधान दिया है। बाबा साहेब ने मनुवाद के सिद्धांत पर आधारित हजारों कथा-कहानियां, स्मृति,वेद, पुराण आदि काल्पनिक कथाओं को नकारते हुए हमें सकारात्मक, बौद्धिक, तार्किक और विज्ञान-शोधित विचारधारा दिया है। समाजवाद और मंडलवाद भी इसका ही एक अंश है, जिसको हमलोग आजकल अंबेडकरवाद नाम से जानते पहचानते  हैं।
   इस विचारधारा में सभी महापुरुषों का योगदान है और सभी महापुरुष हमलोगों के लिए पूज्यनीय हैं। महापुरुष की कोई जाति नहीं होती है और महापुरुषों को जाति के आधार पर छोटा बड़ा नहीं देखना चाहिए। यही देखना तो ब्राह्मणवाद है और जो भी सिर्फ अपनी जाति का महापुरुष समझकर, उसे मान -संमान देता है, वह भी ब्राह्मणवादी मानसिकता का पोषक है।
   मिशन- "गर्व से कहो हम शूद्र हैं" यह पूर्ण रूप से अंबेडकरवाद पर आधारित है और इसकी प्राथमिकता भी धीरे-धीरे, देर सबेर सभी को स्वीकार करना होगा, तभी हम ब्राह्मणवाद को टक्कर दे सकते हैं, अन्यथा एक -दूसरे  जातियों के महापुरुषों और भगवानों को ऊंच-नीच की एलर्जी लेकर आपस में लड़ते रह जाएंगे।
    यह मिशन एक-दो सालों का नहीं है, जैसे कयी पीढ़ियों से आ रहा है, वैसे ही कयी पीढ़ियों तक संघर्ष  चलता रहेगा। यह भी आप याद रखिए और किसी फरेबी के बहकावे में मत आइए, आज जो भी अधिकार या मान-सम्मान मिला है वह बाबा साहेब के संविधान की वजह से मिला हुआ है।
   यदि शूद्र समाज को अपना खोया हुआ मान-सम्मान वापस लेना है तो, एकजुट होकर, पूरी आक्रामकता के साथ ब्राह्मणवाद पर प्रहार करना होगा। शूद्रवाद और अंबेडकरवाद विचारधारा अपनाकर, पूरे देश में सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाना होगा, इसके बाद ही राजनीतिक सफलता पूर्णरुप से स्थाई हो सकती है। अनुभव को देखते हुए, आने वाले समय में ब्राह्मणवाद को टक्कर देने के लिए शूद्रवाद के अलावा आप के पास कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है, प्रमाण है सभी फेल हो चुके हैं।
     गर्व से कहो हम शूद्र हैं।
   आप के समान दर्द का हमदर्द साथी!
    शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
    मो०-W--7756816035