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मेरी आस्था का ख्याल कौन करेगा
May 4, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥23वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 28-04-2020🔥
*🔥मेरी आस्था का ख्याल कौन करेगा?🔥* 
  *आस्थावान मेरे शूद्र भाइयो!* 
       *सविनय निवेदन के साथ , मै यह आप से जानना चाहता हूं कि- -* 
   जब कोई तर्कशील इन्सान संविधान सम्मत, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत,  जाने - अनजाने मे किसी धर्म विशेष के माता, देवी देवता या तथाकथित भगवान के लिए कुछ टिप्पणी, कलाकृति, फोटो या विडियो प्रस्तुत कर देता है तो उसके खिलाफ तुरंत आप  धार्मिक भावनाओ को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए  तोड-फोड, मार-पीट के साथ तुरंत पुलिसिया कार्यवाही मे सहयोग करते हुए ब्राह्मणवाद को और मजबूत करते है। ऐसा करते हुए आप अपने ही आने वाले बच्चो के भविष्य का नुकसान अज्ञानता मे करने लगते है।
     *वही मै भी इस देश का नागरिक होने के नाते, अपने को नास्तिक तो नही मानता ,लेकिन फिर भी सभी तरह के धार्मिक प्रपंचो और एक दूसरे के प्रति नफरत के प्रभाव से इतना दुखी हूं कि,  मै इस विचारो से ,अपने आप को पांच साल की उम्र मे ही लौटकर खुश रहना चाहता हूं।* 
    जब कोई किसी धार्मिक स्थल से सुबह-सुबह  4&5 के बीच जोर-शोर से लाउडस्पीकर के द्वारा भजन कीर्तन, गाना या धार्मिक उद्घोषणा  कर, नींद खराब कर देता है, या विद्यार्थियो की पढ़ाई मे बाधा बनती है,  तब मेरी आस्था बहुत ही आहत होती है। मै मजबूरीवश उस बजाने वाले को और उससे संबंधित भगवान को मन-ही-मन खूब बुरा भला कहते हुए अपने आप को ही सजा देता हूं ।
    *गाय माता नही, एक जानवर है, यह मेरी आस्था है। जब कोई गाय की पूजा-अर्चना करता है या उसको लेकर कोई किसी इन्सान की हत्या तक कर देता है, तब मेरी आस्था बहुत आहत होती है।* 
   इन्सान को पृथ्वी पर आने से पहले, विश्व की सभी नदिया, झील, समुद्र अस्तित्व मे पहले से ही मौजूद थे । भगीरथ ने गंगा को नही लाया है, उसका बाप भी उसमे डुबकी लगाता था। पूरी झूठी मनगढ़ंत कहानी है। सड़ी गली लाशो से लिप्त, शहरो के गन्दे पानी और कचरे से भरपूर एक नदी है। यह मेरी आस्था है। लेकिन जब आप और आप का पूरा परिवार पूजा आरती करते है तथा इस तरह  हजारो लाखो अन्धभक्त आस्था की डुबकी लगाते, लुटाते, प्रचार प्रसार करते दिखाई देते है तो मेरी आस्था बहुत ही आहत होती है।
  आज करोना वायरस की डर से सभी धर्म स्थल बन्द कर दिए गए हैं।भगवानों को भी लाक डाउन की वजह से ताला में बन्द कर, आप को दर्शन से भी बंचित किया जा रहा है, और इनको गंगाजल से नहीं, सेनेटाइजर से पवित्र किया जा रहा है, आज आप की आस्था कहां मर गई? क्यो नही विरोध कर रहे हैं?
    *मेरी बाबा साहब के कृतियो और विचारो के कारण मेरी उनमे मानवीयता की आस्था है, जब कोई उनकी मूर्ति को अपमानित या खंडित करता है तो मेरी भी आस्था उद्वेलित हो जाती है तो क्या मै भी प्रतिक्रिया मे तथाकथित नकली भगवानो और देवी देवताओ को अपमानित या खंडित करू?* 
   आए दिन मीडिया मे छाए रहने या मनुवादियो से हमदर्दी जताने के लिए स्वार्थ बस कई अपने लोग भी, बाबा साहेब के ऊपर अपमानित टिप्पणी करते है तो मेरी भी आस्था भड़क जाती है। क्या हमे भी धार्मिक आस्था वालो की तरह ऐसे लोगो का घर द्वार तोड़ना, फूकना या उनका भी हलाल करना चाहिए? 
    *यह तो कुछ नमूना है, ऐसे न जाने कितने मूर्खतापूर्ण धार्मिक कर्मकांड आंखो के सामने दिन प्रतिदिन होते है,  जिससे हमारी आस्था को ठेस पहुंचती है, मन दुखी होता है, घबराहट मे कुछ गलत करने और कानून हाथ मे लेने की खुराक दिमाग मे पनपने लगती है। मजबूरन, कानूनन, जिम्मेदार नागरिक होने के कारण अपने आप को ही  तकलीफ देता रहता हूं। लेकिन कबतक?* 
    आस्था हर इन्सान का निजी अंतःकरण का मामला है। घर के चारदीवारी मे होनी चाहिए। उसे बाजारी बस्तू की तरह रोड पर, सार्वजनिक जगह पर, टीवी चैनल या सोशल मीडिया के जरिए प्रचार प्रसार नही करना चाहिए। लेकिन होता है, आखिर क्यो, किसके लिए, कौन करवाता है? क्या आप को इससे कोई फायदा होता है? तर्क कीजिए। मै समझता हूं हमारी तरह ही लाखो करोड़ो लोगो की आस्था इस व्यवहार से आहत होती है ।
    *मै भी इस देश का सम्वैधानिक स्वतंत्रता प्राप्त नागरिक हू। मुझे भी यहा मान-सम्मान, आस्थावान की तरह जीने का संविधान के द्वारा अधिकार प्राप्त है। मै तो आप की आस्था का ख्याल रखता हू, लेकिन मेरे प्यारे, शूद्र भाइयो ! मेरी आस्था का ख्याल आप नही रखेंगे तो कौन करेगा? धन्यवाद!* 
      !गर्व से कहो हम शूद्र हैं!
  *आप का समान दर्द का हमदर्द साथी* 
    *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
      मो0- w- 7756816035
                   9869075576