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नारी की दुर्दशा की कहानी
March 15, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

मृत पति की चिता पर ज़िंदा पत्नी को जला देते. 8 से 12 वर्ष की मासूम बच्चियों का अधेड़ उम्र के व्यक्ति से ब्याह करने का चलन था. सुहागरात के दिन घुटना टूट जाता, हड्डी सरक जाती, योनि से लगातार खून बहने से मासूम बच्चियां मर जाती !

मनुस्मृति.
पति परमेश्वर है उसका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. शिक्षा संपत्ति का तुम्हे अधिकार नही. वासना का विचार करना पाप है वासना पर सिर्फ पुरषों धर्म गुरु और ऋषियों का आरक्षण है. दिन भर पुरे घर का काम करो, सास ससुर की सेवा करो पति की मार खाओ !

पति का मन किया तो लात मारकर घर से निकाल देता !

कोई न्यायालय नही कोई कानून नही कोई संविधान नही, सब कुछ मनुस्मृति के विधि विधान से चल रहा था !

संविधान.
महाराष्ट्र से एक मसीह निकला नाम था डॉ बाबा साहेब आंबेडकर और जिसका मजहब इंसानियत था. इस आंबेडकर के अम्बेडकारवाद ने सबाल्टर्न समुदाय में गजब का जोश भर दिया. मनुस्मृति का दहन कर ब्राह्मणों के रुडीवादी जातिवादि पुरानी गैर बराबरी परंपरा को कड़ी चुनौती दी !

ब्राह्मण धर्म और ग्रंथों की आलोचना की उनके श्रेष्ठ होने की बीमारी को कड़ी फटकार लगाई और सभी वर्गों की स्त्रीयों को बड़ी राजनीतिक मशक्कत के बाद संविधान में पुरुषों के बराबरी का अधिकार दिया !

ब्राह्मणों ने इसका जमकर विरोध किया, कहा डॉ आंबेडकर अछूत है उसे हिन्दू कोड बिल बनाने और लागू करने का बिलकुल भी अधिकार नही,

लेकिन डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने हार नही मानी हिन्दू कोड बिल लागू करवाकर उन्होंने स्त्रीयों को संपत्ति में हक़ और तलाक लेने का अधिकार दिया !

लेकिन महिलाएं भूल गई आज वे जिस मुकाम पर हैं सिर्फ और सिर्फ डॉ बाबा साहेब अंबेड़कर के कारण. महिलाओं को तिरुपति या सबरीमाला नही चैत्य भूमि पर जाकर माथा टेकना चाहिए !