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पिछड़ी जातियां ही शूद्र
May 4, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥17वां एपिसोड,सुबह,दिनांक 25-04-2020🔥
🔥पिछड़ी जातियां ही शूद्र हैं🔥
     पौराणिक धर्म ग्रंथों, सामाजिक और व्यावहारिक रूप से यह सत्य है और मैं पिछले एपिसोड में लिख चुका हूं कि पिछड़ी जातियों (OBC) को शूद्र  तथा SC.ST को अति शूद्र माना गया है। अब कुछ ऐतिहासिक और कानूनी मान्यताओं पर भी परख लेते हैं।
  1922 में मद्रास हाई कोर्ट ने, मदुराई के कुर्मी, अहीर को शूद्र घोषित किया था, जब कि ए जातियां अपने को क्षत्रिय होने का दावा कर रही थी।
  1924 में भूमिहार जमींदार नारायण सिंह ने बिहार के मुंगेर जिला के लाखूचक गांव में, जनेऊ पहनने का सामूहिक कार्यक्रम कर रहे यादवों पर सैकड़ों की सेना के साथ हमला किया था। नारायण सिंह का कहना था कि धर्म की रक्षा राजा का कर्त्तव्य है और शूद्र यादव जनेऊ कैसे धारण कर सकते हैं?
  1924 में मद्रास हाईकोर्ट ने छत्रपति शिवाजी के वंशज एकोजी के क्षत्रिय होने के दावे को खारिज कर दिया था। मद्रास हाईकोर्ट ने 229 पेज के अपने फैसले में मराठा को क्षत्रिय नहीं बल्कि शूद्र वर्ण में घोषित किया था।
   1926 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्वामी विवेकानंद की कायस्थ जाति को क्षत्रिय मानने से इंकार कर दिया था तथा कायस्थों को भी शूद्र होने का फैसला दिया था।
   1928 में बाम्बे प्रान्त के गवर्नर ने, स्टार्ट नाम के एक अधिकारी की अध्यक्षता में पिछड़ी जातियों के लिए एक कमेटी नियुक्त की थी। इस कमेटी में डा०-बाबा साहेब आंबेडकर जी ने शूद्र वर्ण से जुड़ी जातियों के लिए BACKWARD CAST शब्द का पहली बार उपयोग किया था। जिसको  सामाजिक और शैक्षणिक रुप से पिछड़े लोगों को पिछड़ी जाति कहा गया था। स्टार्ट कमेटी के समक्ष अपनी बात रखते हुए बाबासाहेब ने शुरुआत में देश की जनसंख्या को केवल दो भागों में बांटा गया था।
   1)- अपर कास्ट जिसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य जैसी  सवर्ण जातियां।
   2)- बैकवर्ड कास्ट जिसमें शूद्र और अतिशूद्र में आने वाली सभी जातियां का समावेश था। जिसे अवर्ण या पिछड़ी जातियां कहा गया।
   OBC या अन्य पिछड़ी जातियां का उदय कैसे हुआ?
    सवर्ण जातियों की पहचान में कोई परेशानी नहीं हुई, अब पिछड़ी जातियों की पहचान कर सूची बनाई गई। जो अछूत जातियां समाज में रहकर मेहनत मजदूरी से काम कर समाज सेवा में लगी थी उनकी एक सूची बनाई गई, जिसे हम लोग आज-कल Schedule casts (SC) अनुसूचित जाति कहते हैं।
  पिछड़ी जाति में ही,जो जातियां समाज से दूर रहकर, जंगलों में, या जिनका कोई स्थाई निवास नहीं होता था, घूमते फिरते अपना जीवन व्यतीत करते थे, जिनको आदिवासी भी कहा जाता था।इनकी भी पहचान कर सभी जातियों की सूची बनाई गई। जिसे हम लोग Schedule Tribe (ST) अनुसूचित जनजाति से जानते हैं।
  पिछड़ी जातियों में जिनकी उस समय पहचान नहीं हो पाई ,इस कारण इनकी उस समय कोई सूची भी नहीं बन पाई।उन जातियों को अन्य पिछड़ी जाति (OTHERS BACKWARD CAST, OBC) की श्रेणी में रखा गया। ए लोग स्वतंत्रता के 70 सालों से आजतक सही जनगणना और पहचान के लिए आन्दोलन करते आ रहे हैं।
  संवैधानिक रूप से शूद्र और अति शूद्र को बैकवर्ड क्लास या कास्ट या पिछड़ा वर्ग या पिछड़ी जाति कहा गया है। सिर्फ सूचीबद्ध अलग-अलग बनने या जिनकी सूचीबद्ध जो बाद में हुई, सिर्फ इसी कारणों से कुछ स्वार्थी लोग, राजनीतिक उद्देश्य से इनमें मतभेद पैदा करते आ रहे हैं।
 इसलिए सवर्ण और अवर्ण दो ही वर्ग है। इन दोनों में यदि सामाजिक असमानता की खांई को कम नहीं किया गया तो, सामाजिक चेतना जागृत होने पर आने वाले दिनों में इन दोनों में सामाजिक और राजिनीतिक  संघर्ष तेज होना स्वाभाविक है।
   आप का समान दर्द का हमदर्द साथी
       गर्व से कहो हम शूद्र हैं
        शूद्र शिवशंकर सिंह यादव
         मो०-7756816035