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राजतंत्र उसे कहते थे
April 23, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

*राजतंत्र उसे कहते थे*

जब *तलवार के दमपर* राज होता था ,जो ताकतवर होता था ,संगठित होता था, *जिनके पास छल, बल कि राजनीति होती थी।* वही लोग राजतंत्र मे राज करते थे कि *हम ही ताकतवर हैं इसलिए हम ही तुम्हारे ऊपर राज करेगें*
हम ही निर्धारित करेगें कि
तुम्हें कितना रोजगार देना चाहिए?

तुम्हारी भागीदारी कहाँ और कितनी होनी चाहिए
*शासन कि नीतियां क्या होनी चाहिए*

*तुम्हें क्या खाना चाहिए*
*तुम्हें क्या पहनना चाहिए*
*तुम्हारे पर्व क्या होना चाहिए*
*तुम्हारे ऊपर कितना टैक्स लगाया जाना चाहिए।*
राज हम लोग करेगें और बाकी उनके कहने के अनुसार मजदूरी करेगें।टैक्स देंगे

*अंग्रेजों  से आजादी के बाद भारत मे लोकतंत्र लागू हुआ।*

*देश सभी लोगों का होता है।* 
*सभी लोग संसद मे, न्यायपालिका मे,कार्यपालिका मे और मिडिया मे नहीं जा सकते हैं।*

*130 करोड जनसंख्या संसद मे नहीं बैठ सकती है।*

इसलिए *सभी वर्गों से प्रतिनिधि जाना चाहिए*

*लोकतंत्र जनता कि भागीदारी से होता है*
सभी वर्गों कि भागीदारी से होता है
 यह *रिप्रजेंटेटिव डेमोक्रेसी है*

*हो क्या रहा है?*

देश का *एक वर्ग जो जनसंख्या मे तो अल्पसंख्यक है।* 3.5% है

 *परंतु बहुसंख्यक लोगों पर राज करना चाहता है।यह लोकतंत्र में संभव नहीं है।*

इसलिए *उसने अपना तंत्र विकसित किया है।*

उसे *मेरिटोक्रेसी कहते हैं*

*मेरिटोक्रेसी किसे कहते हैं ?*

*हमारे में ही बुद्धि बल है*
*हमारे ही दिमाग मे ताकत है*
*हम ही सर्वश्रेष्ठ हैं*

 हम ही बुद्धिमान हैं। *आप मे मेरीट नहीं है।*
SC ST OBC MINORITIES के लोग बहुत सीधे हैं
वह *इसका मतलब सीधे सीधे नहीं समझते हैं।*

वह हमारे को मेरीट को आधार बनाकर कहते हैं *तुम लायक नहीं हो।*
*यह बात भी हमारे लोगों को सीधे सीधे समझ नहीं आती है।*

इसका सीधा मतलब होता है
*तूम लोग लायक नहीं हो।*

*नालायक लोग हो* इसलिए हम ही तुमपर राज करेगें
इसका यह मतलब होता है
*सिर्फ और सिर्फ लोकतंत्र मे मेरीट का मतलब यही होता है*

हां बस यही बात हमारे लोगों को समझ आती है।
*इसलिए ब्राह्मण हमारे लोगों को डायरेक्ट नालायक नहीं कहते है।* बस वह बडे प्रेम से कहते हैं
*देख भाई तेरे मे मेरीट नहीं है*
फिर हमारा उच्च शिक्षित लिखे को *पढा कामपर लग जाता है।*

*प्रजातंत्र क्या होता है ?*
उसकी तो उसे दूर दूर तक जानकारी ही नहीं है ।

*लोकतंत्र मे सभी वर्गों के सही, सच्चे प्रतिनिधि ही संसद मे पहुंचे इसके लिए सभी वर्गों को स्वतंत्रता होती है कि वह अपना प्रतिनिधि स्वंय चुनें।*

*ना कि मेरिटोक्रेसी*,इसमें एक वर्ग जो मात्र 15% हे
वह छल, बल, कपट से यह साबित करे
*स्वंय सब साधन संसाधन से युक्त होकर कहे कि हम ही बुद्धिमान हैं*
यही लोग योग्य है
इसलिए ही उनको चुना है
और उसके लिए कोई परिक्षा भी ना हो

और *वही लोग शासन प्रशासन मे जाकर नितियाँ बनाए*

कि हम ही बुद्धिमान हैं
हम ही बताएंगे,
बनाएंगे कि देश के लिए क्या नितियाँ होनी चाहिए

*जिन लोगों ने देश के लोगों को 6743 जातियों में बांटकर अन्याय, अत्याचार, शोषण पाखंड के बलपर राज किया और अब लोकतंत्र लागू हो गया तो कह रहे हैं*
हम ही योग्य हैं
हम ही बुद्धिमान हैं
हम जिनको चुन रहे हैं वही योग्य है

*यह दलील ही गलत है*

*लोकतंत्र जनता कि भागीदारी से होता है*

*अज्ञानता के बलपर, लोगों को लोकतंत्र कि जानकारी ना होने के कारण*
भागीदारी का मतलब ना जानने समझने के कारण ऐसी दलीलें देकर बेवकूफ बनाकर राज कर रहे हैं

*लोकतंत्र योग्यता से नहीं बल्कि भागीदारी को कहते हैं*

शासन प्रशासन मे भागीदारी
न्यायपालिका मे भागीदारी
कार्यपालिका मे भागीदारी
मिडिया मे भागीदारी को कहते हैं

*नहीं तो अंग्रेजों का राज कहाँ बुरा था*
*सभी जगह अंग्रेज राज कर रहे थे*
वह *आज के तथाकथित सवर्णों से बहुत बुद्धिमान थे।*

*वह भी लुट रहे थे*
और *यह भी लुट रहे हैं*
पहले इंग्लैंड पैसा जा रहा था

*अब कालेधन के रूप मे स्वीटजरलैंड जा रहा है।देश के हजारों करोड़ रूपये को लूटकर भाग रहे हैं।*

*क्या देश को लूटने वालों मे कोई.SC ST OBC वर्गों का है ?*

आजादी के बाद से भारत के लोकतंत्र के चारों पिलर पर इन्हीं वर्गों का राज रहा है।
और भारत मे 85% (SC ST OBC Minorities ) 
*भुखमरी मे सर्वश्रेष्ठ*
*बेरोजगारी मे सर्वश्रेष्ठ*
*गरीबी मे सर्वश्रेष्ठ*
*बिमारी मे सर्वश्रेष्ठ*

और 15% लोगों में से
देशभर मे सबसे अमीर,
*उनकी कोई नहींसमस्या नहीं है*
उनकी एक ही समस्या है कि कैसे  मूलनिवासी बहुजनों पर राज स्थापित रखा जावे।
और *कैसे इनको लगातार मेरिटोक्रेसी के नाम पर बेवकूफ बनाकर  रखा जाये*

देश मे 7 संवैधानिक वर्ग है

जो 6743 जातियों मे बंटे लोगों का प्रतिनिधित्व करता है
(SC ST OBC NT DNT VJNT) व समानता को मानने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक लोगों का वर्ग

*इन वर्गों कि भागीदारी हिस्सेदारी के बिना लोकतंत्र कैसे ?*

लोकतंत्र भागीदारी का नाम है

*ना कि राजतंत्र या मेरिटोक्रेसी का नाम है।*

देश के 85%  मूलनिवासी बहुजनों (SC ST OBC MINORITIES) *अपनी भागीदारी कि लडाई लडो। अधिकार मांगें नहीं जाते हैं ,मांगने से सिर्फ भीख मिलती है अधिकार सिर्फ छिने जाते है,संघर्ष से हासिल किए जाते हैं |