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संविधान के प्रति समाज में जागरूकता के बाद बदलाव जरूर आते है कोशिश करके देखिए
January 23, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

संविधान के प्रति समाज में जागरूकता के बाद बदलाव जरूर आते है कोशिश करके देखिए.....
कुछ ही साल पहले की बात है कि बहुजन समाज को यह तो मालूम था कि बाबासाहब अंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया है लेकिन बहुत ही कम शिक्षित लोगों ने संविधान के पन्ने पलटे होगे,या संविधान की प्रस्तावना को पढा होगा,उसके भावों की गंभीरता को समझा होगा.
               लेकिन अब काफी बदलाव आया है पहले भारत में सिर्फ़ लॉ की बुक्स के बड़े प्रकाशक ही संविधान को बड़ी संख्या में छापते थे. कीमत भी ज्यादा होने के कारण वह आम व्यक्ति की पहुंच से दूर था. 
       लेकिन अब भारत के कुछ शहरों से बहुजन समाज के समर्पित छोटे बड़े प्रकाशक अन्य वैचारिक साहित्य के साथ संविधान को छापने की मुहिम चला रहे हैं. पहले गैरबहुजन प्रकाशक संविधान की प्रति पर संसद या बाबासाहब का चित्र नहीं लगाते थे. लेकिन उनको अब ऐसा करने को मजबूर होना पड़ रहा है वह क्यों ,आइए जानते हैं 
          साल भर पहले बुद्धम पब्लिशर्स जयपुर ने भी संविधान को पेपरबैक व हार्ड कवर में सुंदर ढंग से छोटी व बड़ी साइज में, बाबासाहब ,संसद, तिरंगा, धम्म चक्र के साथ आकर्षक कवर डिजाइन बनाकर छापना शुरू किया,  वह भी बहुत ही कम कीमत पर. पूरे भारत में बहुत तेजी से वितरण शुरू किया. ऑनलाइन व सोशल मीडिया में भी अव्वल रहा. कुछ ही महीनों में इसका कवर डिजाइन इतना अधिक पॉपुलर हो गया कि यह संविधान का पर्याय बन गया.                                     गैरबहुजन प्रकाशक जो संविधान को छापते थे, उनकी मांग कम हो गई तो उन्हें भी मजबूर होकर अपने संविधान के कवर की डिजाइन बदलकर बाबा साहब, तिरंगा संसद आदि को शामिल करना पड़ा. हालात यहां तक पहुंच गए कि बहुजन प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित संविधान अधिक लोकप्रिय होने लगे.
        आज देश में यह स्थिति है कि बहुजन समाज में हर अवसर पर बाबासाहेब के चित्र के साथ संविधान की प्रस्तावना की तस्वीर , पोस्टर ,संविधान की प्रतियां भेंट करने की परंपरा बन गई है. छोटे बड़े हर समारोह के शुरू में प्रस्तावना का सामूहिक पाठ  की क्रांतिकारी परंपरा शुरू हो गई है. गांव, स्कूल कॉलेज या सरकारी ऑफिस ही नहीं  बल्कि घरों में भी संविधान की प्रिएम्बल को बड़े गर्व से लगाया जाता है .
       बहुजन समाज को अब लग रहा है कि संविधान के रूप में बाबा साहब ने इस समाज व देश को कितनी महान धरोहर दी है. घर घर पहुंच रहे संविधान के कारण बहुजन समाज के साथ आम नागरिक को भी यह महसूस हो रहेआ हैं कि आज संविधान के प्रति लोगों को जागरूक कर इसे बचाया जाना क्यों जरूरी है.
      इसलिए आप सभी से आग्रह है कि संविधान को घर-घर पहुंचाने की मुहिम से जुड़े और यथासंभव वैचारिक जाग्रति का साहित्य , संविधान की प्रतियां स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, गांव, शहर में परिजनों,मित्रों, युवाओं को भेंट करें.
        बदलाव जरूर आता है कोशिश कर देखिए. दूसरों के काल्पनिक संविधान को सोशल मीडिया में प्रचारित कर समाज को डराने की बजाय अपनी जिम्मेदारी निभाएं .असली संविधान को घर घर पहुंचाइए.
..जय भीम...जय भारत.. .जय संविधान..
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