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शूद्र उपाधि की सार्थकता
January 3, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

*🔥शूद्र उपाधि की सार्थकता 🔥* 
                                दिनांक 30-12-2019
    *हमे याद है, 1988-89 के आसपास कुछ शूद्र समाज के पढ़े-लिखे लोग भी अपने नाम के पहले पंडित उपाधि लगाने लग गये थे। एकबार मेरी किताब "बहुजन चेतना " पढ़कर, पंडित चंद्रिका प्रजापति जी ने मुझे भी खत लिखकर पंडित की उपाधि लगाते हुए तर्क के साथ कहने लगे कि, आप विद्वान है, इसलिए आप पंडित है, पंडित कोई जाति नही होती है।* 
    मैने उनको समझाते हुए कहा था कि  - नेहरू, मदनमोहन, कमलापति आदि कई , बिद्वान कुछ भी नही थे, लेकिन पंडित की उपाधि से उन्हे नवाजा गया था। लेकिन वही, गान्धी जी को बापू, पटेल जी को सरदार, राजेन्द्र प्रसाद जी और जगजीवन जी को बाबू, अम्बेडकर जी को बाबा साहब आदि । सवाल है ? क्या ये लोग विद्वान नही थे ?
     *बहस होते हुए निष्कर्ष यही निकला कि, ब्राह्मणी के पेट से जो भी (गवार) पैदा होगा वही पंडित की उपाधि का हकदार है। दूसरा कितना भी विद्वान हो, वह नही ।* 
   समाज मे जागरूकता आने के बाद ब्राह्मणो ने भी पंडित की उपाधि लगाना कम कर दिया। क्योंकि  पंडित से पाखंडी और जाति का एहसास होने लगा। अब तो सिर्फ पूजा -पाठ कराने वाले पाखंडी ही अपने आप को पंडित बताते है।
    *बाबा साहब अम्बेडकर और कई महान विद्वान शूद्रो मे पैदा होने से, ब्राह्मण खुद अपनी विद्वत्ता के अहंकार से ग्रसित हो गया, लेकिन शूद्रो की जाति की नीचता की मानसिकता के कारण  आज भी ब्राह्मण (विद्वत्ता के कारण नही) सिर्फ जाति की उच्चता के कारण उच्च बना हुआ है। इसका एहसास ब्राह्मणो को हे लेकिन शूद्रो को नही है।* 
    चार साल से, *गर्व से कहो हम शूद्र है,* मिशन चलाने से अब शूद्रो मे भी कुछ हद तक यह भावना पैदा हो रही है कि ब्राह्मण अब किसी भी तरह से शूद्रो से उच्च नही है और अपने आप को शूद्र कहने ,बोलने मे संकोच नही कर रहे है ।
    *चार साल पहले इस मिशन को चलाते हुए, जब मैने अपने नाम के पहले शूद्र लिखना शुरू किया तो सभी समाज से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। सबसे ज्यादा हमारे यादव भाइयो से मिली। तू नकली यादव है, अपने घर का पता बताओ, यादवो के लिए कलंक है, तू श्री कृष्ण भगवान् को भी कलंकित कर रहा है,  तू बौद्ध धर्म ग्रहण कर ले, मुसलमान बन जाओ, आप शूद्र लिखते हो तो हमलोगो को बहुत तकलीफ होती है, कभी ग्रूप से निकाल देते, कभी अच्छा लिखने के कारण रख लेते आदि कड़वे अनुभव का सामना करना पड़ा।     यह महसूस करते हुए कि मैने एक सामाजिक गलती की है, उसे बर्दाश्त करते हुए समझाने की कोशिश करता रहा।* 
    मुझे कहते हुए आज खुशी हो रही है कि, यादव समाज के करीब दस ग्रूप है और किसी से अब कोई शिकवा -शिकायत नही है। बहुत से यादव भाई शूद्र उपाधि भी लिख रहे है और शूद्र मिशन भी चला रहे। मौर्य समाज, पाल समाज आदि जातियो के लोग भी शूद्र उपाधि लगाना शुरू कर दिये है। लेकिन अभी भी संख्या कम है।
   *लेकिन अफसोस बहुत सी  अछूत शूद्र  ही अपनाने मे संकोच कर रहे है।* 
  साथियो, मै अपने अनुभव से दावा कर रहा हूं कि जिस दिन 6000 जातियो मे बटे शूद्र, अपने मतभेद भुलाकर सभी लोग नाम से पहले शूद्र की उपाधि लिखना और बोलना  शुरू कर देगे, उसी दिन से ब्राह्मण अपना सर नेम छिपाना शुरू कर देगा तथा तिलक और चुन्नी दोनो गायब हो जाएंगे। जाति की ऊंच नीच की भावना भी समाप्त होने लगेगी ।
     *साथियो, आप सभी से, और विशेष रूप से जो लोग इस मिशन से जुडे है और समझ भी गये है ,उनसे तहे दिल से अनुरोध है कि, शूद्र की उपाधि अपने नाम के पहले लगाने की कोशिश करे और ब्राह्मणवाद को समाप्त करने मे सहयोग करे।* 
   वास्तव में यदि आप मिशन को सही समझ गये है और इसका परिणाम भी देखना चाहते हैं तो, सहयोग के रूप में, कुछ स्लोगन दिवालो पर स्टिकर या लिखवाकर खुद अनुभव और परिणाम भी जान सकते हैं। अभी सुरुवात में एक ही स्लोगन!
  "गर्व से कहो हम शूद्र हैं" काफी है।
  *शूद्र उपाधि एक बार लगाइए, लगाते ही आत्मबल , मनोबल बढ़ा हुआ आप खुद महशूस करने लगेंगे और सभी शूद्र भाइयो को भी अपनी सही ताकत का एहसास होने लगेगा। धन्यवाद!* 
   आप का समान दर्द का हमदर्द साथी!
 *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
 मो0 -W-9869075576
              7756816035