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शूद्रो का शातिर दुश्मन कौन
April 21, 2020 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

*🔥शूद्रो का शातिर दुश्मन कौन🔥* 
   आज मेरी उम्र  69 की हो रही है। बचपन मे याद है एक देवकुर घर ( भगवान का घर) हुआ करता था। अनपढ़ गवार कोई भी पुरोहित  ( पंडित ) हर एकादशी (महीने मे दो बार ) को शाम घर पर आता, पाव किलो देशी घी का हवन करता। कुछ घी ले भी जाता था ।रूपये पैसे के अलावा दक्षिणा (चावल, आटा दाल) भी देना पड़ता था। 
   *सभी छोटे बड़ो को तिलक लगाता, सभी लोग उसके पैर छूते और वह सबको आशीर्वाद देता था। अर्थात सबको नीच बनाता था। बचपन मे कहानी भी सुनते थे "आन का आटा, आन का घी, शाबस -शाबस बाबा जी "* 
  भगवान् के नाम पर एक सामाजिक धार्मिक परम्परा बन गई थी । इस तरह से ढोंगी पाखंडी  काम, जैसे  बच्चे के जन्म के समय को मूर (अपशकुन ) बता देना और पूजा-पाठ करके शुद्धि करना, तो कभी नामकरण, कभी सत्यनारायण कथा आदि रूपो मे चलता रहता था । ब्राह्मण पाखंड ने हिन्दू धर्म मे जीवन पर्यन्त भरण पोषण का एक तरीका निकाला था, जिसका नाम था "मां बाप का गुरू-मुख होना " इसके माध्यम से गुरु- मुख दम्पति की कमाई मे 25% की हर साल हिस्सेदारी देना और जब कभी गुरू-मुख पंडित जी सामने दिखाई दिए तो दंडवत प्रणाम करना अनिवार्य था ,अन्यथा अनर्थ होने का डर दिलो-दिमाग मे भर दिया गया था । दूध दही या कुछ दक्षिणा मांग दिया तो अपने बच्चे का हक्क मारकर उसको देना पहली प्राथमिकता होती थी । हमे याद आ रहा है आठवी  (1966) तक हमलोगो (10 ) के साथ एक ब्राह्मण का लड़का भी पड़ता था , वह कितना भी बदमाशी करता था, हमलोग उसे ,इस डर से कि बरम लगेगा, कभी उसे गाली या मारते नही थे। 
  *इसी तरह शादी -विवाह या मरने के बाद अन्तिम संस्कार मे भी भाज्ञ -भगवान्, पाप -पुन्य का डर और लालच दिखा कर जन्म से लेकर मरने तक आर्थिक, मानसिक, सामाजिक शोषण करता रहता है ।ब्राह्मण द्वारा अपने जजमान शूद्रो को नीच बनाकर उनका मनोबल गिराना और इस तरह उनको धार्मिक गुलाम बनाना, विश्व का सबसे बड़ा अपराध माना गया है ।* 
 *अफसोस हमलोग आज भी  अज्ञानता और मूर्खता मे अपने पुर्वजो के अपराधियों को ही मान सम्मान देते चले आ रहे है ।* 
 आज भी जब कभी मै गांव जाता हूं ,हमारे समकक्ष या छोटी उम्र का अनपढ़ गवार ब्राह्मण, सामने होने पर,  जिज्ञासा भर यह उम्मीद करता है कि, मै ही पहले उसे इज्जत देते हुए नमस्कार या पाय लागू बोलू।
 कुछ सामंती अहंकारी शूद्रों का यह विरोधाभास कि आप की परवरिश के माहोल के कारण आप के साथ ऐसा हैं, मेरे साथ ऐसा व्यवहार कभी नहीं हुआ। एक दो अपवाद हो सकता है। मैं आज भी मुंबई में काफी संपन्न यादवों को "पांव लागी पंडित जी" संबोधन करते हुए देखता हूं। हमारे एक चिर- परिचित संमानित डाक्टर साहब को, जिनकी उम्र करीब 75 साल हैं, अपने ब्राह्मण परिचित रोगियों को पांव लागी पंडित जी संबोधन करने पर, उन्हें मैंने टोका भी हैं। उनका कहना, यह शिष्टाचार पहले से ही चला आ रहा है।
    *हिन्दू धर्म का मुख्य तत्व ज्ञान भी यही है कि ब्राह्मण सिर्फ मान सम्मान पाने का अधिकारी है, देने का नही ।* 
  हमारा बचपन से लेकर आज तक मुसलमानो से नौकरी पेशा मे या सामाजिक जीवन चर्या मे हमेशा साथ रहा है। मै 1979 - 1998 तक मुस्लिम बहुल क्षेत्र जोगेश्वरी यादव नगर मे रहा हूं ।यादव नगर का अध्यक्ष होने के कारण भी मै यह दावा करता हूं कि,  कभी किसी भी तरह से किसी को अनायास अपमानित नही किया है। उल्टे जब भी सामना  हुआ है ,हमे मान सम्मान और सहयोग ही दिया है और लिया भी है। कुछ असामाजिक तत्व तो हर समाज मे होते है, इसे नकारा नही जा सकता।
   *कुछ लोग तो कुछ कारणो से इतने अच्छे होते है कि हम सोच नही सकते, जैसे ब्याज या सूद न लेना, दूध मे पानी न मिलाना, असहाय और गरीबो की  यथाशक्ति मदद करना । मेरा साधारण अनुभव भी कहता है , यदि मुसलमानो के साथ राजनीतिक दुर्भावना, काश्मीर मसला और पर्सनल बाद -विबाद को न देखे ( जो कि हर परिवार मे भाई भतीजे के साथ सबसे ज्यादा होता है )तो कही कोसो दूर तक दुश्मनी का कारण नजर नही आता है ।* 
 *एक अनुभव शेयर करना उचित समझता हं।* 
  बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुम्बई मे 1993 मे हिन्दू -मुस्लिम दंगा हो गया। यादव नगर के साथ साथ कुछ और हिन्दू बस्ती चारो तरफ से मुस्लिम बस्ती से घिरी हुई थी । यादव नगर के हनुमान मंदिर और सगुफा बिल्डिंग के मस्जिद की दीवार कामन थी। बाहर से असमाजिक कुछ लोग आते थे, तरह तरह के अफवाह फैला कर यादवों में और मुसलमानों में दंगा कराने की कोशिश करते थे। एक दो बार कोशिश भी किए, जिसे भगाकर असफल कर दिया गया। एक ब्राह्मण भी आता था लोगों को भड़काता और झूठी खबरें जैसे, सगुफा बिल्डिंग में और मस्जिद में हथियारों का जखीरा जमा है। मैं खुद बोला, तुम बाहर रहकर देख लेते हो और हम लोग यहीं रहकर नहीं देख पाते हैं। हम लोगों को मूर्ख समझा है क्या? उसको बराबर जबाब देकर मै भगा देता था । हिन्दू -मुस्लिम शान्ति एकता कमेटी भी बन गई थी । जोगेश्वरी रेल्वे स्टेशन आने जाने के लिए करीब  500 मीटर मुस्लिम बस्ती से ही गुजरना पड़ता था ।किसी हिन्दू को कोई नुकसान न हो, मुस्लिम भाई पूरे रास्ते की चौकसी करते हुए सुरक्षा की जिम्मेदारी लिए हुए थे । मै भी कुछ लोगो के साथ  यादव नगर के बाहर चौराहे पर ही हर समय चौकसी करता था ।पूरी एरिया मे शान्ति थी ।एक बार पुलिस की गाड़ी आई, मै खुद सामने आकर अधिकारी से बात किया और कहा साहब यहा सब नार्मल है। इतना कहते ही डंडे चला दिया और कहा यह तुम्हारा काम नही है घर से बाहर मत निकलो । उनके इरादो को समझते हुए भी अपना फर्ज निभाया और यादव नगर मे दंगा भड़काने के लाख कोशिश के बाद भी कही किसी को एक खरोच तक नही आई। जब कि जोगेश्वरी पूर्व और आस पास के इलाके सभी दंगें की चपेट में थे।
  *ठीक है मान लिया स्वतंत्रता से पहले तुम्हारा मनु सम्विधान था। तुमने शूद्रो को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक तथाकथित हिन्दू बनाकर शोषण किया। लेकिन आज भी समता, समानता और बन्धुत्व पर आधारित शूद्रो के मूलभूत  सम्वैधानिक अधिकारो का हनन और बिरोध भी ब्राह्मण ही करता है जबकि मुसलमान सहयोगी और हमदर्द हर मौके पर दिखाई देता है ।* 
  अब आकलन आप को करना है कि शूद्रो का शातिर दुश्मन कौन है? 
*आप का समान दर्द का हमदर्द साथी!* 
    *शूद्र शिवशंकर सिंह यादव* 
        Mo-W- 9869075576
                      7756816035