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वैचारिक आतंक वाद क्या है जाने
November 17, 2019 • Mr. Pan singh Argal (Dr. PS Bauddh)

🔥 वैचारिक आतंकवाद🔥
                     दिनांक 17-11-2019
     बड़े दुःख के साथ इस विषय पर लिखने को मजबूर होना पड़ा। कुछ दिन पहले बाबा रामदेव ने एक वक्तब्य दिया कि, बामन मेश्राम के विचार समाज में वैचारिक आतंकवादी की तरह हैं। मुझे भी वक्तव्य ग़लत लगा, लेकिन तुरंत प्रतिक्रिया में, मैंने  लिखा,यदि  ढोंग पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष को यदि आप वैचारिक आतंकवाद मानते हैं तो, मुझे वैचारिक आतंकवादी होने का गर्व है।
    लगातार उसी दिन से सभी सोसल मीडिया पर मूलनिवासियों के द्वारा (लगता है इनके पास कोई काम ही नहीं है)  बाबा रामदेव को टारगेट करते हुए अशोभनीय, अमर्यादित सैकड़ों तरह के गाली गलौज के साथ लेख तथा न्यूज चैनलों के द्वारा इसी प्रकार के इंटरव्यू, वीडियो आदि,  फ आई आर दर्ज, जेल जाएगा, अब सलाखों में सडेगा, सलवार कमीज़ दिन, न जाने कहां कहां से ऐसी गालियां सीख लेते हैं, आज़ भी पूरा सोसल मीडिया भरा पड़ा है।
   मैंने सोचा एक दो दिन में गुस्सा उतर जाएगा लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है। क्या इनके पास कोई और काम नहीं है?
  वैचारिक आतंकवाद का लगता हैं इनको मिनिंग ही समझ नहीं आई। इन सभी को ऐसा लगा कि यदि हमें वैचारिक आतंकवादी सिद्ध कर दिया गया तों हम सभी जेल चलें जाएंगे, इसलिए एकतरफा बचाव के लिए अटैक करते हुए साबित करने में लग गए कि, हम लोग वैचारिक आतंकवादी नहीं है। बाबा तुम ग़लत हो।
   भौतिक आतंकवाद का मतलब ही होता है कि दूसरों के दिलों दिमाग में शारीरिक, आर्थिक रूप से डर और आतंक पैदा करना।
   यहां साफ- साफ समझने लायक है कि वैचारिक आतंकवाद मतलब हमारे विचारों से आप के विचारों में डर और आतंक का पैदा होना।
    मुझे याद है, जब मैं   1989 में "बहुजन चेतना"पुस्तक लिखी थी तब उस समय लोगों ने एक मीटिंग में कहा था कि यह हिन्दू समाज के लिए बहुत ख़तरनाक पुस्तक हैं।,सवाल -जबाव में मैंने अपने को बौद्धिक आतंकवादी कहा था और जब तक यह भावना नहीं बनेगी तबतक परिवर्तन नहीं होगा।
   मैं पूछना चाहता हूं मूलनिवासियों से,क्यो बार बार लिखते रहते हो कि, बामन मेश्राम के डर से मोहन भागवत की बोलती बंद हो गई। बामसेफ से आरएसएस डर गया, आदि कयी तरह के वक्तत्व सोसल मीडिया में भरें पड़े हैं। यह वैचारिक आतंकवाद नहीं तो क्या हैं। यदि नहीं है तो दिखावा बन्द करो।
    यह तो, सिर्फ बाबा रामदेव का वक्तव्य है और वहीं, जब भगवा मंडली  किसी बेगुनाह लोगों को सरेआम नंगा करके मारती है, जय भीम लिखे शर्ट पहनने वाले, साइकिल या मोटरसाइकिल पर जय भीम लिखने वालों को सरेआम वीडियो निकालते हुए, जब मारते हैं , तब आप का गुस्सा कहां मर जाता है। सोसल मीडिया पर उनका नाम लेकर एक गाली तक लिखने की हिम्मत नहीं होती है या किसी बेगुनाह शूद्र या मुस्लिम को रोड पर मारते हुए देखते हो, तब मुर्दों की तरह क्यों मूकदर्शक बने रहते हो। यही जो आज गुस्सा हैं, कहां मर जाता है।
   कभी कभी ऐसा लगता है कि, कहीं बाबा रामदेव और बामन मेश्राम की इस वक्तव्य के पीछे मिली भगत तों नहीं है।
    इस अवधारणा के पीछे मेरा अनुभव भी है। बाबा रामदेव बामसेफ की बहुत कद्र और इज्ज़त करतें हैं। मैं 2012  पतंजलि योगपीठ में प्रशिक्षण शिविर कम मेडिकेशन के लिए एक सप्ताह रहने का मौका मिला। करीब २००० लोग थे। रजिस्ट्रेशन के दूसरे दिन वन बाय वन सभी को खड़ा कराते हुए, खुद गिनती करते हुए, कितने लोग आर एस एस से, भाजपाई, सपाई, बसपाई, कांग्रेसी और लास्ट में बामसेफी, हम सिर्फ चार लोग खड़े हुए। आश्चर्य यह हुआ कि सभी से परसनल बात किया और खुलेआम पूरी सभा में कहा कि ए लोग सामाजिक परिवर्तन के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
     मैं खुद पूछताछ कर पता लगाया 90% तक संस्थान मे शूद्र और बेसहारा लोग ही खुशहाली में काम करते है।
  एक आश्चर्य यह भी बता दूं और हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि, जब सभी ब्राह्मण गिनती के लिए खड़े हुए स्वभाविक है ज्यादा भी थे, तब उनका पहला वक्तत्व था कि " आप सभी को ब्राह्मण की उच्चता के घमंड को इस कम्पलेक्स के बाहर छोड़कर अन्दर आना है।
   सभी के सर नेम रजिस्ट्रेशन के समय निकाल दिया गया, सिर्फ नाम। यहां बहुत कुछ लिखना बिषय नहीं है।
    यही आज मूलनिवासी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन जब यही बाबा ब्राह्मणवाद के खिलाफ, उनके देवी देवताओं पर कटाक्ष करते है तब यही मूलनिवासी, सर आंखों पर लेते हुए गुणगान करने लगते हैं और ब्राह्मण लोग  उनकेे पुतले तक फूंकने लगते हैं।
  अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि, मैं बाबा रामदेव का भक्त तों नहीं हूं, लेकिन इतना जानता हूं कि, बाबा एक गिने चुने सम्पन्न शूद्र व्यापारी हैं, सरकारी गुलाम होना लाजमी है, कांग्रेस का बिरोध कर भोग चुके है। कोई साथ नहीं दिया। ग़रीबी के कारण १२ साल की उम्र में घर छोड़कर ब्राह्मणों के बीच में रहकर कहीं हमसे और आप से ज्यादा ब्राह्मणवाद का शोषण बाबा ने बर्दाश्त किया है, अनुभव भी है और उनके दिल में इसकी ज्वाला भी मौजूद है।
    दोष हम सभी 85% नासमझ बिघटित शूद्रों का हैं जो ,ऐसे कई हमारे शूद्र व्यापारी हैं जिनकी सामाजिक आर्थिक राजनीतिक सुरक्षा करने में हमलोग टोटली फेल है।
  आप जिस दिन गारंटी लेंगे,उसी दिन ए सभी आपके होंगे। धन्यवाद!
    आप के समान दर्द का, हमदर्द साथी
   शूद्र शिवशंकर सिंह यादव